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24 जनवरी को शनि का राशि परिवर्तन: काले क्यों हैं शनि देव, जानिए उनसे जुड़ी खास बातें

Thu, 23 Jan 2020 09:10 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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shanidev
30 वर्षों के बाद शनि एक बार फिर अपनी स्वयं का राशि मकर में आ रहे हैं। 24 जनवरी को शनिदेव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि को न्यायाधीश माना गया है। शनि अच्छे कर्म करने वालों के अच्छा परिणाम और बुरे कर्म करने वालों को अशुभ फल देते हैं। शनि के राशि परिवर्तन के मौके पर आइए जानते हैं शनि से जुड़ी खास बातें।
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shani dev
  • शनिदेव काले क्यों
शनिदेव के पिता का नाम सूर्यदेव और माता का नाम छाया है। छाया भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थीं। माता छाया शिवजी की तपस्या में इतनी लीन रहती थीं कि उनको गर्भ में पल रहें शनि की चिंता नहीं रहती। इस कारण से ना तो वह खुद अपना और ना ही गर्भ में पल रहे अपने बच्चे का ध्यान रख पाती। जिसके कारण से शनिदेव काले और कुपोषित पैदा हुए।
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shanidev
  • बच्चों पर क्यों नहीं पड़ती शनि छाया
12 साल तक के बच्चों पर शनि का प्रकोप कभी नहीं रहता है। इसके पीछे पिप्पलाद और शनि के बीच हुए युद्ध का प्रसंग है। पिप्पलाद ने युद्ध में शनि को परास्त कर दिया और इस शर्त पर छोड़ा कि वे 12 वर्ष तक की आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देंगे। तब से शनिदेव बच्चों पर अपनी छाया नहीं डालते।
 

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shani transit 2020
  • शनिदेव लंगड़े क्यों
भगवान शनि के धीमी चाल और लंगड़ा कर चलने के पीछे पिप्पलाद मुनि के कोप का ही कारण है। पिप्लाद मुनि अपने पिता की मृत्यु का कारण शनिदेव को मानते थे। पिप्पलाद मुनि ने शनि पर ब्रह्रादण्ड से प्रहार किया। शनि यह प्रहार सहन करने में असमर्थ थे। जिस कारण से शनि तीनों लोकों में दौड़ने लगे। इसके बाद ब्रह्रादण्ड ने उन्हें लंगड़ा कर दिया। 
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shani transit 2020
  •  भगवान शिव ने शनि को नियुक्ति किया दण्डाधिकारी
एक बार शनिदेव और भगवान शिव के बीच युद्ध भी हुआ। भयानक युद्ध के बाद भगवान शिव ने शनि को परास्त कर दिया था। बाद में सूर्यदेव की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उन्हें माफ किया। शनि के रण कौशल से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपना सेवक और दण्डाधिकारी नियुक्ति कर लिया। इनकी दृष्टि से मनुष्य क्या देवता भी भयभीत रहते हैं।
 
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shani transit 2020
  • शनि की छाया अशुभ क्यों
शनि की कुदृष्टि का कारण उनकी पत्नी द्वारा दिए गए शाप के कारण है। एक बार शनिदेव की पत्नी पुत्र की लालसा में उनके पास पहुंची लेकिन शनिदेव कठिन तपस्या में लीन थे। इससे आहत होकर पत्नी ने शनिदेव को शाप दिया कि जिस पर भी आपकी दृष्टि पड़ेगी उसका सबकुछ नष्ट हो जाएगा। तब से शनि की छाया को अशुभ माना जाने लगा।
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shani transit 2020
  • शनिदेव की कुदृष्टि कई देवताओं और राजाओं पर पड़ी
शनिदेव की कुदृष्टि से कई देवी-देवताओं को शिकार होना पड़ा था। शनि के कारण ही भगवान गणेश का सिर कटा था। इसके अलावा भगवान राम को वनवास और रावण का संहार शनि के कारण ही हुआ था। शनि की काली छाया की वजह से ही पांडवों का वनवास का दर्द झेलना पड़ा था। इसके अलावा राजा विक्रमादित्य और त्रेता युग में राजा हरीशचन्द्र को शनि के कारण दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी।

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shani transit 2020
  • शनि के ऐसे ना करें दर्शन
मंदिर में शनि की पूजा करते समय एक बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए। पूजा में कभी की शनिदेव की आंखों में आंख डालकर नहीं देखना चाहिए बल्कि पैरों की तरफ देखना चाहिए। शनिदेव की आंखों देखने से शनि संकट का खतरा बढ़ जाता है।
 

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  • शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या
24 जनवरी 2020 से शनि मकर राशि में भ्रमण करेंगे। ऐसे में धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती रहेगी है जबकि मिथुन और तुला राशि पर ढय्या।
 

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  • शनि का रत्न और फूल
शनिदेव को नीलम रत्न और नीले रंग का फूल बहुत ही पसंद होता है जो भक्त शनिवार के दिन नीले रंग का फूल चढ़ाता है उससे शनिदेव बहुत ही प्रसन्न होते हैं।
 

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shani transit 2020
  • शनि देव का परिवार
सूर्यदेव और छाया शनि देव के माता-पिता हैं। यमराज, यमुना और भद्रा शनि के भाई-बहन हैं। शनि का जन्म शिंगणापुर में माना गया है और जन्म तिथि अमावस्या तिथि को है। 

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  • हनुमानजी, भैरवनाथ, बुध ग्रह और राहु को शनि का मित्र माना जाता है।
  • शनि देव को काले रंग की चीजें प्रिय होती हैं जैसे काला कपड़ा और तिल

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  • शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं।
  • शनि की महादशा 19 वर्ष की होती है।

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  • ज्योतिष में शनिदेव को कर्म के देवता माने गए हैं। शनि ग्रह अच्छे कर्म करने पर शुभ फल देते हैं। 
  • शनिदेव उन लोगों के लिए शुभ रहते हैं जो मेहनती होते हैं।
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  • हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनिदेव के प्रकोप से बचा जा सकता है।
  • शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए हर शनिवार सरसों के तेल दान करना चाहिए।
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