जब भी शनि की साढ़ेसाती का नाम आता है तो लोगों के मन में डर बैठ जाता है। शनि की साढ़ेसाती हर किसी के जीवन में एक बार जरूर आती है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। यह किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि को न्याय के देवता कहा जाता है क्योंकि यह न्यायप्रिय हैं। व्यक्ति के अच्छे कर्म करने पर अच्छा फल जबकि बुरे कर्म करने पर दण्ड देते हैं। आमतौर पर लोग शनि की साढ़े साती की बहुत ही कष्टकारी मानते हैं। लेकिन शनि की साढ़ेसाती व्यक्ति को सही दिशा में चलने की तरफ संदेश देते हैं। ज्योतिष के अनुसार शनि की साढ़ेसाती का सबसे बुरा प्रभाव छठे, आठवें और बारहवें भाव में माना जाता है इसके अलावा मकर, कुंभ, धनु और मीन लग्न में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव ज्यादा बुरा फल नहीं देता जितना किसी अन्य लग्न में।