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Shani Jayanti 2020: 22 मई को शनि जयंती, जिन पर है साढ़ेसाती और ढैय्या उन्हें रहना होगा सतर्क

Sun, 17 May 2020 12:03 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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शुक्रवार, 22 मई को ज्येष्ठ माह की अमावस्या है। शनिदेव का जन्म इसी तिथि पर हुआ था इसलिए अमावस्या तिथि पर हर साल शनि जयंती मनाई जाती है। शनि दोषों से छुटकारा और उनकी कृपा पाने के खास दिन है शनि जयंती। ज्योतिष के अनुसार शनि जयंती के मौके पर शनि वक्री रहेगा। शनि के वक्री होने से इस समय सबसे ज्यादा असर शनि के साढ़ेसाती और ढैय्या वाले जातकों पर पड़ेगा। ऐसे में शनि दोषों से मुक्ति के लिए इन जातकों के लोगों को विशेष पूजा करनी चाहिए।
शनि जयंती के अवसर पर शनि साढ़े साती और ढैय्या से बचने के लिए शनि धाम कोकिलावन में कराएं तेल अभिषेक
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साढ़ेसाती और ढैय्या वाले रहें संभलकर
24 जनवरी 2020 को शनि 30 वर्षों के बाद स्वयं की राशि मकर में आए थे जिसके चलते धनु, मकर और कुंभ राशि वालों इस समय शनि की साढ़ेसाती सवार है। इन तीन राशियों के जातकों के साथ परेशानियां बनी रहेगी। काम में सफलता कम ही मिलेगी। वाद-विवाद होता रहेगा। वहीं मिथुन और तुला राशि वालों पर शनि की ढैय्या चल रही है। जिसके कारण इन दो राशियों के जातकों को भी कोई खास सफलता नहीं मिलेगी। 
Shani Jayanti 2020: पांच राशियों है पर शनि की कुदृष्टि, जानें कितने दिनों तक रहता है साढ़ेसाती का प्रभाव
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क्या करें और क्या नहीं
- काले तिल और उड़द से बनी खाने की चीजें का दान करें।
- शनिदेव की प्रतिमा को तेल चढ़ाएं और शनिवार को खिचड़ी खाएं।
- शनिदेव की पूजा में नीले फूल का उपयोग करें, शनिवार को लाल कपड़े न पहनें
- शनिदेव को तिल के तेल का दीपक लगाएं, 
- शनिवार के दिन मांस मंदिर और लहसुन-प्याज न खाएं।
- शनिवार को खाने में तेल का उपयोग न करें।
Shani Jayanti 2020: 22 मई को शनि जयंती, क्यों की जाती है शनिदेव की पूजा?
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