अपनी राशि पर शनि की साढ़ेसाती के आरंभ होते ही हर प्राणी यह सोचकर भयभीत होने लगता है कि, अब क्या होगा ! किन्तु ये साढ़ेसाती की 2700 दिन की अवधि का कालखंड कष्टकारक ही हो ऐसा नहीं हैं। किसी भी राशि पर जिस पर शनिदेव की साढ़ेसाती आरंभ होने वाली हो उस राशि के किस अंग पर इनका विचरण होता है यदि आप इसे समझ कर उसी के अनुसार निर्णय एवं उपाय करें तो साढ़ेसाती एवं ढैय्या के अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है।
शनि की साढ़ेसाती का प्रथम 100 दिन मुख पर प्रभाव-
साढ़ेसाती के आरंभ होते ही इनका प्रथम प्रभाव 100 दिनों तक मनुष्य के मुख पर रहता है। जो बेहद कष्ट कारक होता है शनि के आरंभ का यह समय इतना पीड़ा देने वाला होता है कि व्यक्ति शनिदेव की साढ़ेसाती के नाम से घबराता है।
दूसरा प्रभाव 400 दिन दाहिनी भुजा पर
शनि की साढ़ेसाती का दूसरा प्रभाव प्राणियों के दाहिनी भुजा पर रहता है, जो सर्वथा विजयश्री दिलाता है। भारत के अधिकतर बड़े बड़े नेता साढ़ेसाती की इसी अवधि में सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे हैं। इस अवधि के मध्य किए गए सभी संकल्प-कार्य पूर्णतया सफल रहते हैं।
तीसरा प्रभाव 600 दिनों तक प्राणियों के चरणों में
इस काल में साढ़ेसाती का प्रभाव मनुष्य के चरणों में रहता है, जिसके फलस्वरूप व्यक्ति देश-विदेश की तीर्थ यात्राएं करता है। समाज में प्रतिष्ठित लोगों से मेलजोल बढ़ता है और व्यापार एवं नौकरी आदि में अच्छी उन्नति तथा मकान-वाहन के सुख भोगता है।
चौथा प्रभाव 500 दिनों तक पेट (उदर) पर
इस काल में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव मनुष्य के पेट पर रहता है, जो हर प्रकार से लाभदायक सिद्ध होता है स्वास्थ्य अच्छा रहता है और अनेकों स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद मिलता है। साढ़ेसाती का यह समय व्यक्ति के कामयाबियों के लिए अति शुभ फलदाई रहता है।
पांचवां प्रभाव 400 दिनों तक बाईं भुजा पर
इतनी लंबी अवधि तक साढ़ेसाती का प्रभाव प्राणियों के बाईं भुजा पर रहता है, जो बेहद कष्टकारक रहता है साढेसाती की इस अवधि में व्यक्ति यह निर्णय लेने में विवश दिखाई देता है कि उसे करना क्या है। निर्णय लेने में कठिनाइयां तो होती ही हैं कहीं न कहीं वह निराशा और परेशान हो जाता है।
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छठवां प्रभाव 300 दिनों तक प्राणियों के मस्तक पर
इस अवधि में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव व्यक्ति के मस्तक पर रहता है, जिसके फलस्वरूप प्राणियों के कार्य व्यापार में उन्नति सामाजिक प्रतिष्ठा एवं पद और गरिमा की वृद्धि होती है। इस अवधि में व्यक्ति जहां भी जाता है उसे कामयाबी और ही यश प्राप्त होता है।
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सातवां प्रभाव 200 दिनों तक नेत्रों पर
इस समय में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव मनुष्य के नेत्रों पर रहता है, जिसके शुभ प्रभाव के फलस्वरूप वह तीर्थयात्रा, यज्ञ, जप-तप, पूजा-पाठ, दान पुण्य आदि सभी तरह के अच्छे कर्म करता है उसे घर परिवार में मांगलिक कार्यों से सुख मिलता है।
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shani transit 2020
- फोटो : shani transit 2020
आठवां प्रभाव 200 दिनों तक प्राणियों के गुदास्थान पर
यह काल शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण होता है, जब साढ़ेसाती उतरती है। इस अवधि में शनि की साढ़ेसाती जीवात्माओं के गुदा स्थान पर रहती है जिसके फलस्वरूप उसे अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता है। साढ़ेसाती का यह कालखंड इस तरह से रहता है कि इसके मध्य आई परेशानियों को व्यक्ति जीवनपर्यंत याद रखता है।
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shani transit 2020
- फोटो : shani transit 2020
अपने गोचर काल में जब शनिदेव किसी भी राशि पर गोचर करते हैं तो अपने पीछे की चौथी और आठवीं राशि पर अपनी ढैया का भी प्रभाव छोड़ते हैं इस कालखंड का फल प्राणियों के कर्मों के अनुसार ही मिलता है। यदि आपके कर्म अच्छे रहे तो आप मालामाल हो जाएंगे इसीलिए इसे लघु कल्याणी ढैया भी कहते हैं।
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shani transit 2020
किन्तु अशुभ एवं पाप कर्मों में लिप्त रहने पर यह अवधि और भी कष्टकारी रहती है। इसमें व्यक्ति को अत्यधिक उतार-चढ़ाव, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और कार्य बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उस अवधि के मध्य यदि शनि पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो तो इनकी ढैया की अशुभता में कमी आती है।
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इन राशियों पर है शनि की साढ़ेसाती
तीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है धनु, मकर और कुंभ राशि। धनु पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण, मकर राशि पर दूसरा चरण और कुंभ राशि पर पहला चरण चल रहा है।