shani dev
शनि का प्रभाव जिनकी भी साढ़ेसाती,ढैया या दशा या अंतर्दशा शनि की चल रही होगी उन पर शनि के इस गोचर का प्रभाव अधिक पड़ेगा। शनि के गोचर से धनु राशि से साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी तथा मीन राशि पर साढ़ेसाती की शुरुआत हो जाएगी। मकर राशि के अंतिम चरण की तथा कुंभ राशि के दूसरे चरण की शुरुआत हो जाएगी। शनि कर्म के ग्रह हैं। शनि साढ़ेसाती काल में दुःख ही नहीं देते,सुख भी देते हैं। बल्कि सुख के दिन दुःख के दिनों से ज्यादा होते हैं। बल्कि जन्म लग्न,सूर्य लग्न तथा चन्द्र लग्न,इन दिनों से ही जन्म पत्रिका के केन्द्र भाव में या त्रिकोण भाव में शनि स्थित हों तो अत्यंत शुभ फल देने की स्थिति में आ जाते हैं। चन्द्र राशि से चौथे और आठवें भाव में अगर शनि गोचर करें तो इसे ढैय्या कहते हैं और इसके अशुभ फल प्राप्त होते हैं। इस बार यह हो रहा है कि ना केवल शनि राशि बदल रहे हैं बल्कि बृहस्पति,राहु और केतु भी अप्रैल माह में ही राशि बदल चुके हैं। इसलिए इन ग्रहों के मिश्रित परिणाम होंगे। विंशोत्तरी दशा पद्धति में 120 वर्ष की गणना की जाती है जिनमें से शनिदेव को 19 वर्ष प्रदान किये गये हैं। शनि की दशा के समय ही यदि साढ़ेसाती आ जाए तो परिणामों में तीव्रता आ जाती है। ज्योतिष में शनि को दण्डनायक कहा गया है और ये कर्मों का फल प्रदान करते हैं। शनि की दशा या साढ़ेसाती काल में व्यक्ति साधारण नहीं रह पाता,बल्कि उसका उत्थान या पतन देखने को मिलता है।