क्रूर कहे जाने वाले ग्रह शनिदेव बुधवार से अगले 143 दिनों तक वे वक्री ही रहेंगे। इसका असर कई राशियों पर पड़ेगा।
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ज्योतिष के अनुसार शनि का वक्री होना बड़ी आकाशीय घटना है। ऐसा अक्षय तृतीया पर होने से इस दिन सोने के बजाए चांदी की खरीदारी करनी चाहिए। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि शनिदेव प्रात: 7.15 वक्र गति से घूमने लगेंगे।
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शनि एक क्रूर ग्रह होने से वे और क्रूर हो जाएंगे। जबकि यदि गुरु, शुक्र, बुध आदि वक्री हो तो शुभ प्रभाव पड़ता है। मंगल का वक्री होना भी कष्टकारी माना गया है। शनि और मंगल धनु राशि में एक साथ बैठ रहे हों, तो वह और भी अशुभ है।
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इस समय ग्रहों के राजा गुरु भी वक्र गति से वक्री होकर घूम रहे हैं। उनका ऐसे घूमना शुभ फलदायक है। शनि के 15 डिग्री पर घूमने से अत्यंत अशुभ फल मिलता है, गुरु की वक्र गति उसके प्रभाव को कुछ धीमा करेगी।
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किंतु गुरु जून तक वक्री रहेंगे, जब कि शनि छह सितंबर तक वक्री चलेंगे। डा. मिश्रपुरी के अनुसार वृश्चिक, धनु और मकर राशि वालों पर पहले ही शनि की साढ़ेसाती चल रही है। इन राशियों के लिए शनि का अधिक प्रभाव पड़ेगा। वृष और कन्या राशियों पर शनि की ढइया चलने से कुछ लाभ भी होगा। बाकी सभी राशियों के लिए शनि का वक्री होना सकारात्मक प्रभाव छोड़ेगा।
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शनि यदि धनु राशि पर वक्री होता है, तो प्रकृति पर प्रभाव अशुभ पड़ता है। इस बार अक्षय तृतीया के दिन शनि का वक्री होना स्वर्ण की खरीद पर भारी पड़ेगा। इसके विपरीत चांदी की खरीद सात गुणा फल देगी। शनि धनु की राशि पर वक्री है, धनु का स्वामी गुरु भी वक्री है।
ऐसे वक्रत्व काल में खरीदा गया सोना लाभ नहीं देता। मिश्रपुरी ने बताया कि जिनके लिए अशुभ फल है, उन्हें भैरव मंदिर में काले कपड़े में बांधकर उड़द की दाल चढ़ानी चाहिए। सरसों की तेल का दीपक जलाना भी कष्ट को कम करेगा।