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हाथ पर बंधे लाल धागे का धार्मिक लाभ होने के साथ सेहत के लिए भी होता फायदेमंद

Sat, 06 Feb 2021 08:19 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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raksha sutra
हिंदू सनातन धर्म में कलाई पर लाल धागा, मौली, नाड़ा बांधने की परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है। कलाई पर बांधे जाने वाले धागे को मौली या रक्षासूत्र भी कहा जाता है। पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और विशेष तिथियों पर मंत्र उच्चारण करते हुए यह धागा बांधा जाता है। इसके बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती है। कलाई पर बांधी जाने वाली मौली में तीन और पांच रंग के धागे होते हैं। मौली बांधने के धार्मिक लाभ तो होते ही हैं यह स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद रहती है। तो चलिए जानते हैं कि कब से चली आ रही है मौली बांधने की परंपरा और क्या हैं इसके धार्मिक एवं स्वास्थ्य लाभ...
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कलावा बांधने की परंपरा की शुरुआत - फोटो : अमर उजाला
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए वामन स्वरूप में भगवान विष्णु ने उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था। इसके अलावा जब देवराज इन्द्र वृत्रासुर से युद्ध करने जा रहे थे,तब इंद्राणी ने उनकी भुजा पर रक्षा सूत्र बांधा था। माना जाता की इसलिए रक्षा कवच के रूप में मौली बांधी जाती है।
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kalawa
मौली बांधने के धार्मिक लाभ
जब भी कलाई पर ये धागा बंधवाते हैं तब अपने मंत्रों का जाप भी किया जाता है। जिसका सकारात्मक प्रभाव व्यक्ति पर पड़ता है। मौली में तीन से लेकर पांच रंगों का सूत प्रयोग किया जाता है।ऐसा माना जाता है कि हाथ में मौली का बांधने से मनुष्य पर भगवान ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा तीनों देवियों- लक्ष्मी, पार्वती एवं सरस्वती का आशीर्वाद बना रहता है। मान्यता अनुसार मौली बुरी नजर और संकट से रक्षा करती है।
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mauli - kalava
मौली बांधने से स्वास्थ्य लाभ 
मौली कलाई पर उस स्थान पर बांधी जाती है, जहां से नाड़ी की गति मापी जाती है और व्यक्ति के शरीर में रोग का पता किया जाता हैं। इस जगह पर मौली बांधने से नाड़ी की गति पर दबाव बना रहता है, इसी स्थान से शरीर का नियंत्रण रहता है। मौली से दबाव बने रहने से कफ, वात और पित्त में सामंजस्य स्थापित होता है, जिससे हम कब,वात और पित्त से संबंधित रोगों से बचे रहते हैं।
 
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