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रामायण: जानें प्रभु श्रीराम को कब, कहां और कैसे मिले थे उनके सबसे बड़े भक्त हनुमान

Wed, 22 Apr 2020 09:16 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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Ramayan - फोटो : twitter
भगवान श्रीराम के सबसे बड़े भक्तों में हनुमान जी हनुमान जी का नाम सबसे पहले आता है। वे स्वयं भगवान शिव के अवतार हैं। हनुमान जी से प्रभु श्रीराम की भेंट वनवास के दौरान हुई थी। जब कपटी रावण ने पंचवटी (महाराष्ट्र में नासिक के समीप) से माता सीता का अपहरण कर उन्हें लंका ले गया तब प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण जंगलों में माता सीता को खोजते हुए दर-दर भटक रहे थे। 
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रामायण - फोटो : सागर आर्ट्स
इस बीच वे भटकते-भटकते किष्किंधा पहुंच गए। जहां दो वानरराज भाइयों सुग्रीव और बाली में राज्य के लिए युद्ध चल रहा था। बाली शक्तिशाली था इसलिए सुग्रीव उससे डरकर ऋष्यमूक पर्वत की एक गुफा में छिप गया। इसी क्षेत्र में अंजनी पर्वत पर हनुमान जी के पिता का राज था और यहीं अंजनी पुत्र हनुमान जी रहते थे।
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रामायण के किरदार - फोटो : Twitter
उधर, प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में ऋष्यमूक पर्वत पहुंच गए। प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को देखकर सुग्रीव भयभीत हो गया। उसे लगा कि कहीं इन दो वीरों को उनके भाई बाली ने तो उन्हें मारने के लिए नहीं भेजा है। मन में ये शंका लेकर वे हनुमान जी पास पहुंचे और उनसे कहा कि हे हनुमान! आप ब्रह्मचारी का रूप धारण करके उन अज्ञात वीरों के पास जाओ और यह पता लगाओ की कहीं उन्हें मेरे भाई बाली ने तो मुझे मारने के लिए नहीं भेजा है। तब हनुमान जी ने ऐसा ही किया।

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हनुमान जी - फोटो : Social media
हनुमान जी ब्राह्मण का रूप धारण कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण के पास पहुंचे। जब उन्होंने प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को देखा तो वे उनके तेज से बेहद प्रभावित हो गए। वे समझ गए थे कि ये दोनों वीर कोई आमजन नहीं, बल्कि साक्षात किसी देवता के रूप हैं। हनुमान जी ने उनसे कहा कि हे तेजस्वी वीर! आप कौन हैं और किस निमित्त यहां आए हैं? आप दोनों नर हैं या नारायण?
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Ramayan Serial - फोटो : twitter
अपने सबसे बड़े भक्त का सवाल सुनकर प्रभु श्रीराम ने अपना परिचय दिया और अपने भटकने के कारण भी बताया। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी से उनका परिचय भी पूछा। हनुमान जी अपने आराध्य देव को पहचान गए और उन्होंने अपने नाथ के चरणों में गिरकर उन्हें दंडवत प्रणाम किया। 
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Ramayan Serial - फोटो : twitter
हनुमान जी अपने असली रूप में आ गए। अपने नाथ के दर्शन कर हनुमान जी के चेहरे पर खुशी का ठिकाना न रहा। मानो सारी दुनिया की खुशी उन्हें मिल गई हो। प्रभु श्रीराम ने उन्हें अपने हृदय से लगा लिया। हम सब जानते हैं कि हनुमान जी का माता सीता की खोज और लंका विजय में कितना बड़ा योगदान था।
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