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16 कलाओं वाले कृष्ण के बारे में क्या कहता है पंचांग, क्या आप में भी हैं ऐसे गुण?

Mon, 03 Sep 2018 01:14 PM IST
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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भगवान विष्णु के सभी अवतारों में भगवान राम को 12 कलाओं का ज्ञान था, जबकि श्रीकृष्ण श्री संपदा, भू संपदा, कीर्ति संपदा, वाणी सम्मोहन, लीला, कांति, विद्या, विमला, उत्कर्षिणि शक्ति, नीर-क्षीर विवेक, कर्मण्यता, योगशक्ति, विनय, सत्य धारणा, आधिपत्य और अनुग्रह क्षमता समेत 16 कलाओं से परिपूर्ण थे। कृष्ण को पूर्णावतार माना जाता है क्योंकि उन्होंने गुरु सांदीपनि से इन सभी 16 कलाओं को सीखा था। आइए भारतीय पंचांग के अनुसार श्रीकृष्ण के गुणों को जानते हैं — 
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तिथि – अष्टमी
सूर्य एवं चंद्र के अंतर से तिथि का निर्माण होता है और अष्टमी तिथि के दिन जन्म लेने वाला व्यक्ति धर्मात्मा, सत्यवादी, दानी, भोगी, दयावान और सभी कर्मों में निपुण होता है। 
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वार– सोमवार
पूर्ण ग्रह सात होने के कारण सप्तवारों की रचना की गई है। एक वार सूर्योदय से दूसरे दिन के सूर्योदय पूर्व तक रहता है। सोमवार के दिन जन्में भगवान कृष्ण में वार अनुसार गुणों को देखें तो ऐसा जातक कल्पनाशील, प्रियवक्ता, बुद्धिमान, सौन्दर्य और सम्पत्ति से युक्त होता है। 

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नक्षत्र– रोहिणी
जिस दिन चंद्रमा जिस स्थान पर होता है, उस दिन वही नक्षत्र रहता है। रोहिणी नक्षत्र में जन्में जातक की बात करें तो ऐसा व्यक्ति धनवान, कृतज्ञ, मेधावी, राजमान्य, प्रियवता, सत्यवादी और सुन्दर होता है। 
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योग– हर्षण
सूर्य-चंद्र के 13 अंश 20 कला साथ चलने से एक योग होता है। हर्षण योग में जन्में जातक की बात करें तो व्यक्ति बड़ा भाग्यशाली व राजमान्य, विज्ञान और शास्त्रों में निपुण होता है।
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करण– कौलव
तिथि के अर्द्ध भाग को करण कहते हैं और कौलव करण में जन्मा जातक सबसे प्रीति और मित्रों का संग करने वाला तथा सम्मानित होता है। श्रीकृष्ण के भीतर ये सभी गुण स्पष्ट रूप से नजर आते हैं। 




 
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