गंडमूल दोष उत्पन्न करने वाले नक्षत्र
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गंडमूल दोष उत्पन्न करने वाले नक्षत्र
गंडमूल दोष ज्योतिष में तब माना जाता है जब किसी व्यक्ति का जन्म 27 नक्षत्रों में से कुछ विशेष नक्षत्रों में होता है। इनमें अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती शामिल हैं। इन नक्षत्रों को इसलिए खास माना जाता है क्योंकि ये राशि चक्र के शुरुआती या अंतिम भाग में स्थित होते हैं जहां ऊर्जा में बदलाव और अस्थिरता की स्थिति मानी जाती है। उदाहरण के तौर पर अश्विनी नक्षत्र मेष राशि की शुरुआत में आता है जबकि रेवती मीन राशि के अंत में स्थित होता है। इन नक्षत्रों के स्वामी ग्रह भी इनके प्रभाव को निर्धारित करते हैं जैसे अश्लेषा का स्वामी बुध, मघा का सूर्य और केतु तथा मूल नक्षत्र का संबंध केतु से होता है। अगर किसी का जन्म इन नक्षत्रों के विशेष चरणों में होता है तो गंडमूल दोष का प्रभाव अधिक माना जाता है। इसलिए कुंडली का गहराई से अध्ययन किया जाता है ताकि दोष की स्थिति को समझकर उचित उपाय और शांति विधियां अपनाई जा सकें।