कुंडली में शुक्र ग्रह
शुक्र ब्रह्मा जी के साथ सृष्टि सृजन में मुख्य भूमिका निभाते हैं अतः इन्हें देवों से भी श्रेष्ठ माना गया है। ये वृषभ एवं तुला राशि के स्वामी माने गए हैं। बृहस्पति की राशि मीन में जब शुक्र प्रवेश करते हैं तो इनको उच्चराशिगत शुक्र की संज्ञा दी जाती है जबकि, कन्या राशि की यात्रा के समय ये नीचराशिगत माने गए हैं। इनके द्वारा निर्मित योगों में 'मालव्य योग' सर्वाधिक प्रभावशाली एवं फलदाई माना गया है। ये सौंदर्य, भौतिकवाद, अति विलासिता वाला जीवन, हीरे-जवाहरात, फिल्म उद्योग, सौन्दर्य प्रतियोगिताओं, मकान-वाहन के सुख, खूबसूरत जीवनसाथी, उत्तम स्वास्थ्य, ब्रह्म ज्ञान, तंत्रिका तंत्र, एवं सृजन आदि के कारक माने गए हैं।
इनके बलवान रहने पर व्यक्ति का स्वास्थ्य उत्तम रहता है और काया निरोगी रहती है किंतु कमजोर या नीच राशि रहने पर व्यक्ति को तरह-तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए किसी भी जातक की जन्मकुंडली में अच्छे जीवन यापन के लिए शुक्र का भागवत विचार सर्वाधिक महत्व रखता है। जन्मकुंडली में यदि शुक्र कमजोर हैं तो उपाय अवश्य करवाना चाहिए और बलवान हैं तो उपाय की कोई आवश्यकता नहीं। धनु राशि में शुक्र के आगमन का प्रभाव सभी 12 राशियों पर कैसा पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।