ग्रहों में युवराज कहे जाने वाले बुध 3 जून को वक्री अवस्था में मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण और वृषभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस राशि पर भ्रमण करते हुए ये 16 जून को रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में प्रवेश करेंगे। 23 जून को मार्गी होंगे और 3 जुलाई को पुनः मिथुन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। बुध बुद्धि, वाणी और व्यापार के कारक ग्रह हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान रहता है। इसलिए इनके वक्री मार्गी होने का प्रभाव इन क्षेत्रों पर सर्वाधिक दिखाई पड़ता है। वैदिक ज्योतिष में बुध को मार्केटिंग, बुद्धि कौशल, व्यवसाय, प्रबंधन, और संचार आदि का कारक माना गया है। बुध को तटस्थ ग्रह माना गया है। यानी शुभ ग्रह से आने पर यह जातक को शुभ फल प्रदान करते हैं और अशुभ ग्रह के संपर्क में आने पर अशुभ फल। जिस किसी की कुंडली में बुध अनुकूल स्थिति में रहते हैं व्यक्ति को बुद्धिमानी और तार्किक ढंग से निर्णय लेने में सहायता प्रदान करते हैं। वृषभ राशि में बुध के आ जाने के प्रभावस्वरुप राहु के दोषों में कमी आ जाएगी। इनके वक्री होने का सभी राशियों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।