फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kundali Love Failure: प्यार में हर बार असफलता का कारण बनते हैं ये ग्रह, जानें कुंडली से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

Tue, 22 Apr 2025 04:29 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हम सब चाहते हैं कि हमें सच्चा प्यार मिले, एक ऐसा साथी मिले जो हमारे साथ हर सुख-दुख में खड़ा रहे। लेकिन बहुत बार ऐसा होता है कि किसी को प्यार मिलता ही नहीं, या मिला भी तो लंबे समय तक टिक नहीं पाता। आइए जानते हैं इसके पीछे के कारण। 
विज्ञापन
1 of 8
astrological factors in love - फोटो : adobe stock
Signs of Relationship Failure in Astrology: हर व्यक्ति चाहता है कि उसके जीवन में जो भी कोई खास व्यक्ति आए वह सदैव उसके साथ खड़ा रहे, फिर चाहे वो सुख हो या दुख। लेकिन आजकल आपको अक्सर यही सुनने को मिलता है कि किसी का ब्रेकअप हो गया या किसी का तलाक हो गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हमारी कुंडली में कुछ खास ग्रह और योग ऐसे होते हैं जो हमारे प्रेम जीवन को सीधा तौर पर प्रभावित करते हैं। पंचम भाव (प्यार का भाव) और सप्तम भाव (शादी का भाव) अगर किसी अशुभ ग्रह के प्रभाव में आ जाएं, जैसे शनि, राहु, केतु या मंगल, तो प्यार में धोखा, दूरी या बार-बार ब्रेकअप की स्थिति बन जाती है।
Smart Zodiac Signs: बुद्धिमत्ता और सूझबूझ में ये 4 राशियां हैं सबसे आगे, हर क्षेत्र में होते है सफल
कभी-कभी चंद्रमा की स्थिति भी कमजोर होती है, जिससे मन में अस्थिरता आती है और रिश्ते में झगड़े बढ़ जाते हैं। ऐसे में बार-बार संबंध टूटने लगते हैं। आइए जानते हैं कि  किन ग्रहों और योगों की वजह से प्यार में दिक्कतें आती हैं और साथ ही कुछ आसान उपाय भी बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप अपने रिश्तों को बेहतर बना सकते हैं।
Moon Transit in Pisces: 25 अप्रैल को मीन राशि में चंद्रमा का गोचर, इन राशियों के सुख-सौभाग्य में होगी वृद्धि
विज्ञापन

2 of 8
astrological factors in love - फोटो : adobe stock
शनि का दुष्प्रभाव
अगर कुंडली में शनि ग्रह पंचम भाव (प्यार का घर) या सप्तम भाव (शादी का घर) पर दृष्टि डाल रहा हो, तो व्यक्ति के रिश्ते धीरे-धीरे ठंडे पड़ने लगते हैं। बातचीत कम हो जाती है, इमोशन्स दबने लगते हैं और रिश्ता बोझ जैसा लगने लगता है। शनि आपको ज्यादा सोचने वाला और कम बोलने वाला बना देता है, जिससे प्यार में वह गर्मजोशी नहीं रहती।
विज्ञापन

3 of 8
astrological factors in love - फोटो : amar ujala
राहु एवं केतु की स्थिति
राहु जब पंचम भाव में होता है, तो जातक को प्यार में धोखा खाने का अनुभव बार-बार होता है। इस ग्रह के कारण रिश्ते झूठ, दिखावे या स्वार्थ पर टिकते हैं। राहु प्रेम को भ्रम में बदल देता है, जिससे व्यक्ति कभी सच्चे रिश्ते को पहचान ही नहीं पाता।
केतु एक अलगाव देने वाला ग्रह है। अगर ये पंचम या सप्तम भाव में बैठा हो, तो इंसान को या तो प्यार मिलता ही नहीं, और अगर मिले भी, तो दिल नहीं लगता। रिश्तों में सूखापन आ जाता है, और व्यक्ति बहुत जल्दी बोर हो जाता है।

4 of 8
astrological factors in love - फोटो : adobe stock
चंद्रमा पर राहु/केतु का प्रभाव
चंद्रमा मन का कारक है। अगर चंद्रमा राहु या केतु के साथ बैठा हो, तो व्यक्ति का मन अस्थिर हो जाता है। रिश्तों में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े शुरू हो जाते हैं, और ऐसा लगता है कि सामने वाला समझ ही नहीं रहा। इससे अक्सर ब्रेकअप तक बात पहुंच जाती है।
विज्ञापन

5 of 8
astrological factors in love - फोटो : Adobe Stock
मंगल का प्रभाव
मंगल अगर 5वें, 7वें या 8वें भाव में हो, तो रिलेशनशिप में गुस्सा, तकरार, वर्चस्व की भावना या “मैं ही सही हूँ” वाला रवैया बढ़ जाता है। ऐसे लोग अक्सर लड़ाई में बात को बढ़ा देते हैं और रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है।
विज्ञापन

6 of 8
astrological factors in love - फोटो : adobe stock
राहु-केतु की महादशा का प्रभाव
जब कुंडली में राहु या केतु की महादशा चल रही हो, तो व्यक्ति रिश्तों को लेकर बहुत उलझन और बेचैनी महसूस करता है। इस दौरान रिश्तों में टकराव, अलगाव और ब्रेकअप की संभावना बहुत बढ़ जाती है। केतु की दशा में तो कभी-कभी तलाक या कोर्ट केस तक की नौबत आ जाती है।
विज्ञापन

7 of 8
astrological factors in love - फोटो : adobe
प्रेम में असफल होने के प्रमुख योग
  • अगर कुंडली का पंचम भाव (जो प्रेम और रोमांस का घर होता है) उसका स्वामी ग्रह अगर छठे (दुश्मनी), आठवें (रुकावटें) या बारहवें (वियोग) भाव में चला जाए, तो व्यक्ति को प्रेम जीवन में संघर्ष, धोखा या अलगाव का सामना करना पड़ता। 
  • अगर पंचम भाव में राहु, केतु, शनि या सूर्य जैसे ग्रह बैठ जाएं, तो प्यार में बार-बार रुकावटें आती हैं। ये ग्रह रिश्तों को या तो भ्रम में डालते हैं या फिर भावनात्मक दूरी पैदा कर देते हैं।
  • चंद्रमा मन का और शुक्र प्रेम और आकर्षण का ग्रह होता है। अगर ये दोनों ही ग्रह पीड़ित हों यानी अशुभ ग्रहों के साथ हों या कमजोर हों तो व्यक्ति को भावनात्मक संतुलन नहीं मिल पाता, जिससे प्रेम जीवन अस्थिर हो जाता है।
  • अगर कुंडली में पंचम (प्रेम) और सप्तम (विवाह) भाव के बीच कोई संबंध न बन रहा हो, तो प्यार मिल भी जाए तो शादी तक बात नहीं पहुंचती।
  • अगर दूसरे, पांचवें और ग्यारहवें भाव में शनि, मंगल, राहु जैसे क्रूर ग्रह बैठ जाएं या उनकी दृष्टि हो, तो व्यक्ति को धोखे का सामना करना पड़ सकता है।
विज्ञापन

8 of 8
astrological factors in love - फोटो : instagram
प्रेम में सफलता हेतु उपाय
  • हर सुबह राधे कृष्ण का नाम लेकर उनका ध्यान करें और उनके फोटो को अपने कमरे में रखें।
  • हर शुक्रवार को गुलाब के फूल चढ़ाएं और भगवान को मीठा भोग अर्पित करें।
  • अगर आपकी कुंडली में राहु या केतु की स्थिति प्रेम जीवन में धोखा या भ्रम पैदा कर रही हो, तो शनिवार को पीपल के पेड़ पर सरसों का तेल चढ़ाएं।
  • राहु और केतु को शांत करने के लिए ॐ राम राहवे नमः और ॐ कें केतवे नमः का जाप करें।
  • हर सोमवार को ॐ चं चंद्राय नमः का 108 बार जाप करें, जिससे चंद्रमा की स्थिति मजबूत हो।
  • हर शुक्रवार को ॐ शुक्राय नमः का जाप करें और सफेद वस्त्र या चीजों का दान करें।
  • चंद्रमा को शांत रखने के लिए रात को एक गिलास पानी में थोड़ा दूध मिला कर उसे चंद्रमा को अर्पित करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें