astrological factors in love
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राहु एवं केतु की स्थिति
राहु जब पंचम भाव में होता है, तो जातक को प्यार में धोखा खाने का अनुभव बार-बार होता है। इस ग्रह के कारण रिश्ते झूठ, दिखावे या स्वार्थ पर टिकते हैं। राहु प्रेम को भ्रम में बदल देता है, जिससे व्यक्ति कभी सच्चे रिश्ते को पहचान ही नहीं पाता।
केतु एक अलगाव देने वाला ग्रह है। अगर ये पंचम या सप्तम भाव में बैठा हो, तो इंसान को या तो प्यार मिलता ही नहीं, और अगर मिले भी, तो दिल नहीं लगता। रिश्तों में सूखापन आ जाता है, और व्यक्ति बहुत जल्दी बोर हो जाता है।