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Surya Grahan 2026: कल सावन अमावस्या पर लगेगा सूर्य ग्रहण, जानें समय और राशियों पर असर

Tue, 11 Aug 2026 01:48 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Surya Grahan: 12 अगस्त 2026 को सावन अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। ज्योतिषीय दृष्टि से कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लगने वाले इस ग्रहण का असर कुछ राशियों पर सकारात्मक तो कुछ पर सामान्य रह सकता है।

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12 अगस्त 2026 को अमावस्या तिथि के साथ सूर्य ग्रहण का संयोग बन रहा है। - फोटो : अमर उजाला AI

Surya Grahan 2026: सावन अमावस्या इस बार खगोलीय और ज्योतिषीय दोनों लिहाज से खास रहने वाली है। 12 अगस्त 2026 को अमावस्या तिथि के साथ सूर्य ग्रहण का संयोग बन रहा है। यह ग्रहण रात के समय लगेगा और इसकी पूरी अवधि 13 अगस्त की रात तक रहेगी। हालांकि भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का असर राशि और नक्षत्र पर देखा जा सकता है।
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यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, बुधवार को लगेगा। - फोटो : adobe

12 अगस्त को लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण
साल 2026 का यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, बुधवार को लगेगा। पंचांग के अनुसार ग्रहण की शुरुआत रात 9 बजकर 4 मिनट पर होगी। इसके बाद यह ग्रहण 13 अगस्त की देर रात 1 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगा। सूर्य ग्रहण का यह संयोग सावन अमावस्या के दिन बन रहा है। हिंदू पंचांग में सूर्य ग्रहण का अमावस्या से विशेष संबंध माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य ग्रहण अमावस्या और चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के आसपास घटित होता है।

 
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भारत में दिखाई नहीं देगा ग्रहण - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

भारत में दिखाई नहीं देगा ग्रहण
भारत में रहने वाले लोगों के लिए इस सूर्य ग्रहण की सबसे अहम बात इसकी दृश्यता है। यह ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। दुनिया के कुछ हिस्सों में लोग इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में देख सकेंगे। ग्रहण की दृश्यता वाले क्षेत्रों में ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, अटलांटिक महासागर तथा स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्से शामिल बताए गए हैं। वहीं फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी और इटली के कुछ क्षेत्रों में सूर्य ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई दे सकता है।

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भारत में नहीं लगेगा सूतक काल

भारत में नहीं लगेगा सूतक काल
सूर्य ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में सूतक काल का विशेष उल्लेख मिलता है। सामान्य तौर पर सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है। हालांकि इसका धार्मिक पालन मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में किया जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। यानी यहां लोग सामान्य रूप से पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां कर सकते हैं।

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कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में ग्रहण - फोटो : adobe

कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में ग्रहण
ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लगने वाला है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व, मान-सम्मान, पिता और अधिकार का कारक माना जाता है। ऐसे में सूर्य ग्रहण को ग्रहों की स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जाता है। ग्रहण का असर सभी राशि के जातकों पर समान नहीं माना जाता। किसी के लिए यह बदलाव और नए अवसर लेकर आ सकता है तो किसी को फैसले लेते समय अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

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इन 4 राशियों के लिए बन सकते हैं अच्छे योग - फोटो : adobe stock

इन 4 राशियों के लिए बन सकते हैं अच्छे योग
ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर मिथुन, सिंह, तुला और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण का प्रभाव अपेक्षाकृत सकारात्मक रह सकता है। इन राशि वालों के लिए करियर, कामकाज और व्यक्तिगत जीवन में कुछ नए रास्ते खुलने के संकेत मिल सकते हैं। लंबे समय से अटके काम आगे बढ़ सकते हैं और परिस्थितियों में धीरे-धीरे अनुकूल बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि व्यक्तिगत कुंडली में ग्रहों की स्थिति के आधार पर परिणाम अलग हो सकते हैं।

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सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें? - फोटो : Freepik

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें? 
भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां किसी विशेष प्रतिबंध को अनिवार्य नहीं माना जाएगा। फिर भी धार्मिक आस्था रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार मंत्र जाप, ध्यान और प्रार्थना कर सकते हैं। सावन अमावस्या होने के कारण इस दिन दान-पुण्य, पितरों का स्मरण और धार्मिक कार्यों का भी महत्व माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार इन कार्यों को कर सकते हैं।

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सावन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का संयोग - फोटो : adobe stock

सावन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का संयोग क्यों खास?
12 अगस्त को एक ओर सावन अमावस्या है और दूसरी ओर सूर्य ग्रहण का खगोलीय संयोग बन रहा है। सावन अमावस्या को हिंदू परंपरा में स्नान, दान, पितृ स्मरण और धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्सुकता है। हालांकि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां सूतक काल लागू नहीं होगा। धार्मिक अनुष्ठान करते समय स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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