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Samsaptak Yoga: 17 अगस्त तक सूर्य-शनि के साथ बना समसप्तक योग, 4 राशि वाले रहें सतर्क और जानिए उपाय

Thu, 21 Jul 2022 07:05 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सूर्य -शनि के योग से बना समसप्तक योग - फोटो : अमर उजाला
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और शनि दोनों ग्रहों का विशेष महत्व होता है। सूर्य जहां ऊर्जा और आत्मा के कारक ग्रह हैं तो वहीं शनि को कर्मफलदाता और न्याय करने वाले ग्रह माना गया है। ज्योतिष में शनि और सूर्य आपस में शत्रुता का भाव रखते हैं। इन दोनों को ही एक दूसरे का विरोधी ग्रह माना जाता है। 16 जुलाई को सूर्य का राशि परिवर्तन हुआ है। भगवान सूर्य 16 जुलाई की रात्रि 10 बजकर 56 मिनट पर मिथुन राशि की यात्रा समाप्त करके कर्क में प्रवेश कर चुके हैं। सूर्य के राशि परिवर्तन करने से अब सूर्य और शनि दोनों ग्रह आमने-सामने आ चुके हैं। ऐसी स्थिति 17 अगस्त 2022 तक रहेगी। ज्योतिष के विद्वानों के अनुसार सूर्य और शनि का द्दष्टि संबंध अशुभ संकेत दे सकता है। देश-दुनिया के कुछ राशियों पर इसका अशुभ प्रभाव पड़ सकता है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
सूर्य-शनि का अशुभ योग
सूर्य 16 जुलाई से कर्क राशि आ चुके हैं और शनि मकर राशि में पहले से मौजूद हैं। ऐसे में सूर्य और शनि के सामने आने पर समसप्तक योग बन रहा है। शनि और सूर्यदेव का आपस में नहीं बनती है। सूर्य और शनि में पिता-पुत्र का संबंध है। शनि मकर राशि में टेढ़ी चाल से चल रहे हैं, शनि की वक्री चाल अच्छी नहीं मानी जाती है। शनि-सूर्य के आपस में समसप्तक योग से लोगों के बीच मतभेद ज्यादा बढ़ते हैं। कार्यों में असफलताएं हाथ लगती है और मन में निराशा का भाव पैदा होता है।
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astrology
इन चार राशियों पर होगा अशुभ प्रभाव
सूर्य-शनि एक दूसरे के सातवें भाव विराजमान हो चुके हैं ऐसे में सम सप्तक योग का प्रभाव पड़ रहा है। इस समसप्तक योग के कारण सभी 12 राशियों के जातकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा लेकिन इनमें से 4 राशि के जातकों को 17 अगस्त का विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। ज्योतिष गणना के अनुसार मिथुन,सिंह, धनु और कुंभ राशि के जातकों पर सूर्य-शनि के द्वारा बने अशुभ समसप्तक योग का प्रभाव देखने को मिलेगा। इन चार राशि वालों को कार्यों में असफलता प्राप्ति होगी। काम को लेकर तनाव रह सकता है। धन हानि की प्रबल संभावना दिखाई पड़ रही है। निवेश में नुकसान हो सकता है। लड़ाई- झगड़े और वाद-विवाद पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ जाएंगे। कोई गंभीर बीमारी भी हो सकती है। ऐसे में सतर्क रहने की सलाह है।
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भोलेनाथ का किया गया श्रृंगार। - फोटो : अमर उजाला
शनि और शिव पूजा से कम होंगे कष्ट
कुंडली में शनि दोष को कम करने के लिए शनि पूजा का विशेष महत्व होता है। सावन का पवित्र महीना चल रहा है। ऐसे में सूर्य-शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए सावन के महीने में भगवान शिव और शनि की पूजा काफी फायदे देने वाला सिद्ध हो सकता है। इसलिए सावन के महीने के हर शनिवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने और शनि पूजा करने से लाभ मिलता है। इस बार प्रदोष पूजा करने पर शनि का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है। पहला प्रदोष व्रत 25 जुलाई और दूसरा अगस्त 8 अगस्त को होगा।
 
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