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भाई-बहन में क्यों होती है अनबन? कुंडली के ये ग्रह और भाव हो सकते हैं जिम्मेदार

Thu, 18 Jun 2026 10:34 AM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर होने पर जीवन में ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास की कमी हो सकती है। जानिए मंगल को मजबूत करने के ज्योतिषीय उपाय और लाभ।
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भाई बहन में अनबन - फोटो : amar ujala

भाई-बहन का रिश्ता जीवन के सबसे अनमोल रिश्तों में से एक माना जाता है। बचपन की यादों से लेकर जीवन के कठिन समय तक, भाई-बहन अक्सर एक-दूसरे का सहारा बनते हैं। लेकिन कई बार देखा जाता है कि इस रिश्ते में बार-बार तकरार, मनमुटाव या दूरी पैदा हो जाती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ऐसे संबंधों को समझने के लिए कुंडली के कुछ विशेष भावों और ग्रहों का अध्ययन किया जाता है। आइए जानते हैं भाई बहन में झगडा करने में कौन से ग्रह जिमीदार माने जा सकते हैं। 
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भाई-बहन के बीच कौन-सा भाव देखा जाता है? - फोटो : अमर उजाला

भाई-बहन के बीच कौन-सा भाव देखा जाता है?
ज्योतिष में तीसरा भाव (तृतीय भाव) छोटे भाई-बहनों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि ग्यारहवां भाव बड़े भाई-बहनों से संबंधित माना जाता है। इन भावों की स्थिति, उनके स्वामी ग्रह और उन पर पड़ने वाली दृष्टियां भाई-बहन के संबंधों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।

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कुंडली में मंगल ग्रह - फोटो : amar ujala

मंगल का प्रभाव
मंगल को साहस, ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा का ग्रह माना जाता है। यदि मंगल तृतीय भाव में अशुभ स्थिति में हो या इस भाव को प्रभावित कर रहा हो, तो भाई-बहनों के बीच अहंकार, गुस्सा और टकराव की स्थिति बन सकती है। छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ने की संभावना रहती है।

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राहु से बढ़ सकती हैं गलतफहमियां - फोटो : Amar Ujala

राहु से बढ़ सकती हैं गलतफहमियां
राहु को भ्रम और असमंजस का ग्रह माना जाता है। जब राहु भाई-बहनों से जुड़े भावों या उनके स्वामी ग्रह को प्रभावित करता है, तो रिश्ते में अविश्वास, गलतफहमियां और अचानक विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। कई बार बिना किसी बड़े कारण के भी तनाव बना रहता है।

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केतु ला सकता है दूरी - फोटो : adobe stock

केतु ला सकता है दूरी
केतु आध्यात्मिकता और विरक्ति का कारक ग्रह माना जाता है। इसका प्रभाव भाई-बहनों के बीच भावनात्मक दूरी, संवाद की कमी या अलगाव की भावना पैदा कर सकता है। ऐसे जातकों में आपसी प्रेम होने के बावजूद अभिव्यक्ति की कमी देखी जा सकती है।

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शनि का प्रभाव - फोटो : अमर उजाला AI

शनि का प्रभाव
शनि अनुशासन और कर्म का ग्रह है, लेकिन इसकी कठोर प्रकृति के कारण रिश्तों में ठंडापन भी आ सकता है। यदि शनि तृतीय या ग्यारहवें भाव को प्रभावित करे, तो भाई-बहनों के बीच लंबे समय तक मनमुटाव, दूरी या संवादहीनता बनी रह सकती है।

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कमजोर बुध भी बन सकता है कारण - फोटो : adobe stock

कमजोर बुध भी बन सकता है कारण
बुध संचार और समझ का ग्रह है। यदि बुध कमजोर हो या अशुभ प्रभाव में हो, तो बातचीत में गलतफहमी, कटु शब्दों का प्रयोग और संवाद की समस्याएं बढ़ सकती हैं। परिणामस्वरूप भाई-बहनों के बीच विवाद होने लगते हैं।

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कौन-सी स्थितियां तनाव बढ़ा सकती हैं? - फोटो : adobe stock

कौन-सी स्थितियां तनाव बढ़ा सकती हैं?

  • तृतीय भाव में राहु, केतु, शनि या अशुभ मंगल की स्थिति।
  • तृतीय भाव के स्वामी का छठे, आठवें या बारहवें भाव में होना।
  • तृतीय और ग्यारहवें भाव पर पाप ग्रहों की दृष्टि।
  • मंगल और शनि का तनावपूर्ण संबंध।
  • भाई-बहन संबंधी भावों का कमजोर होना।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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