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2026 में कब बजेंगी शहनाइयां: यहां देखें विवाह के शुभ मुहूर्त और गुरु-शुक्र के उदय अस्त होने का समय

Fri, 30 Jan 2026 12:33 PM IST
ज्योति मेहरा महंत रोहित शास्त्री (ज्योतिषाचार्य)

सार

Vivah Muhurat 2026: गुरू एवं शुक्र तारा उदय होने पर ही विवाह तथा अन्य मांगलिक कार्य सम्पन्न किए जाते हैं। विवाह के लिए केवल तिथि ही नहीं, बल्कि वार, नक्षत्र, योग और लग्न का भी विशेष महत्व होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस वर्ष कब-कब बजेगी शहनाई, कब होंगे गुरू और शुक्र अस्त और उदय...
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गुरु-शुक्र अस्त और उदय  - फोटो : Amar Ujala
Shukra Uday 2026: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरू एवं शुक्र तारा उदय होने पर ही विवाह तथा अन्य मांगलिक कार्य सम्पन्न किए जाते हैं। इस विषय में श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री, ज्योतिषाचार्य ने बताया कि विवाह एवं मांगलिक कार्यों में गुरू और शुक्र तारा का उदय होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। 2025 में 12 दिसंबर की देर रात 02:10 बजे शुक्र तारा पूर्व दिशा में अस्त हुआ था तथा 01 फरवरी 2026, रविवार सुबह 07:05 बजे शुक्र तारा पश्चिम में उदय होगा। इनके मध्य अवधि में विवाह आदि मांगलिक कार्य पूर्णतः वर्जित थे। अतः 2026 में 01 फरवरी के बाद ही शुभ मुहूर्त में विवाह एवं मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे।
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2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त - फोटो : Amar Ujala
वर्ष 2026 के विवाह शुभ मुहूर्त

फरवरी
बुधवार – 04 फरवरी
गुरुवार – 05 फरवरी
मंगलवार – 10 फरवरी
शुक्रवार – 20 फरवरी
शनिवार – 21 फरवरी
मंगलवार – 24 फरवरी
बुधवार – 25 फरवरी
गुरुवार – 26 फरवरी

मार्च
सोमवार – 09 मार्च
मंगलवार – 10 मार्च
बुधवार – 11 मार्च
गुरुवार – 12 मार्च
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17 मई से 15 जून तक (पुरुषोत्तम) मलमास रहेगा। - फोटो : Amar Ujala
अप्रैल माह
सोमवार — 20 अप्रैल
मंगलवार — 21 अप्रैल
शनिवार — 25 अप्रैल
रविवार — 26 अप्रैल
बुधवार — 29 अप्रैल
गुरुवार — 30 अप्रैल

मई माह
मंगलवार — 05 मई
बुधवार — 06 मई
गुरुवार — 07 मई
शुक्रवार — 08 मई
रविवार — 10 मई
बुधवार — 13 मई

17 मई से 15 जून तक (पुरुषोत्तम) मलमास रहेगा।

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गुरु अस्त - फोटो : Amar Ujala
जून माह
शुक्रवार — 19 जून
शनिवार — 20 जून
मंगलवार — 23 जून
बुधवार — 24 जून
शुक्रवार — 26 जून
शनिवार — 27 जून
सोमवार — 29 जून

जुलाई माह
बुधवार — 01 जुलाई
शुक्रवार — 03 जुलाई
शनिवार — 04 जुलाई
सोमवार — 06 जुलाई
मंगलवार — 07 जुलाई
बुधवार — 08 जुलाई
गुरुवार — 09 जुलाई
शनिवार — 11 जुलाई

तारा डूबेगा 15 जुलाई से 09 अगस्त तक गुरु अस्त (तारा डूबेगा) रहेगा।

देवशयनकाल (चातुर्मास):
जम्मू–कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में 25 जुलाई से 21 नवंबर तक विवाह के शुभ मुहूर्त।
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शुक्र अस्त  - फोटो : Amar Ujala
अगस्त माह
गुरुवार — 13 अगस्त
मंगलवार — 18 अगस्त
गुरुवार — 20 अगस्त
शनिवार — 22 अगस्त
रविवार — 23 अगस्त
सोमवार — 24 अगस्त
मंगलवार — 25 अगस्त
शनिवार — 29 अगस्त
रविवार — 30 अगस्त

सितंबर माह
गुरुवार — 03 सितंबर
शुक्रवार — 04 सितंबर
शनिवार — 05 सितंबर
शनिवार — 12 सितंबर
रविवार — 13 सितंबर
सोमवार — 14 सितंबर
सोमवार — 21 सितंबर

तारा डूबेगा 12 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक शुक्र अस्त (तारा डूबेगा) 

नवंबर माह
सोमवार — 02 नवंबर
मंगलवार — 03 नवंबर
मंगलवार — 10 नवंबर
बुधवार — 11 नवंबर
गुरुवार — 12 नवंबर
शुक्रवार — 13 नवंबर
शनिवार — 21 नवंबर
रविवार — 22 नवंबर
मंगलवार — 23 नवंबर
बुधवार — 25 नवंबर
गुरुवार — 26 नवंबर

दिसंबर माह
बुधवार — 02 दिसंबर
गुरुवार — 03 दिसंबर
शुक्रवार — 04 दिसंबर
शनिवार — 05 दिसंबर
शुक्रवार — 11 दिसंबर
शनिवार — 12 दिसंबर
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विवाह संस्कार शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाए तो उसका सकारात्मक प्रभाव जीवन भर बना रहता है - फोटो : Adobe Stock
विवाह के लिए केवल तिथि ही नहीं, बल्कि वार, नक्षत्र, योग और लग्न का भी विशेष महत्व होता है। अतः किसी भी तिथि का चयन करते समय वर–वधू की कुंडली मिलान एवं व्यक्तिगत ग्रह-दशाओं का विचार करना अत्यंत आवश्यक है। इससे वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और संतुलन बना रहता है।

आधुनिक समय में लोग सुविधानुसार तिथि चुन लेते हैं, किंतु यदि विवाह संस्कार शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाए तो उसका सकारात्मक प्रभाव जीवन भर बना रहता है। उन्होंने अभिभावकों एवं विवाह योग्य युवक–युवतियों से आग्रह किया कि वर्ष 2026 के शुभ मुहूर्तों की जानकारी समय रहते प्राप्त कर विधि-विधान से विवाह संस्कार संपन्न करें।

शुक्र अस्त से तीन दिन पूर्व "वार्धक्य" तथा शुक्र उदय से तीन दिन बाद तक "बालत्व दोष" माना जाता है। इन दिनों में भी कोई शुभ कार्य वर्जित रहता है। गुरू और शुक्र तारा अस्त के दौरान सगाई (मंगनी) जैसे कार्यक्रम शुभ मुहूर्त में किए जा सकते हैं। इनमें किसी प्रकार का दोष नहीं माना गया है।

तारा डूबने या चढ़ने का तात्पर्य उसके अस्त एवं उदय से होता है, ठीक वैसे ही जैसे सूर्य का उदय और अस्त। खगोल शास्त्र के अनुसार सूर्य पृथ्वी का निकटतम तारा है जो अपने प्रकाश से प्रकाशित होता है, जबकि अन्य ग्रह उसका प्रकाश प्रतिबिंबित करते हैं। भारतीय ज्योतिष में गुरू और शुक्र ग्रह को "तारा" माना गया है।
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गुरू एवं शुक्र तारा अस्त के दौरान निम्नलिखित कार्य वर्जित हैं - फोटो : Amar Ujala
यदि कोई व्यक्ति पुनर्विवाह करता है, तो गुरु–शुक्र अस्त, वेध, लग्न शुद्धि और विवाह-विहित मास आदि का कोई दोष नहीं लगता। पुराने या मरम्मत किए गए मकान में गृहप्रवेश हेतु गुरू–शुक्र अस्त का विचार आवश्यक नहीं है। जीर्णोद्धार किए गए भवन में गुरु–शुक्र अस्तकाल में प्रवेश किया जा सकता है।

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार:
  • शुक्र अस्त के समय यात्रा करने से शत्रु भी वशीभूत हो सकता है।
  • शुक्र अस्तकाल में किए गए वशीकरण प्रयोग शीघ्र सिद्धि प्रदान करते हैं।
  • यात्रा के समय शुक्र का सामने या दाहिनी ओर होना अशुभ माना जाता है।
  • वधू का द्विरागमन गुरु–शुक्र अस्तकाल में वर्जित है, पर आवश्यक स्थिति में दीपावली के दिन किया जा सकता है।
  • राष्ट्र विप्लव, राजपीड़ावस्था, नगर प्रवेश, देव प्रतिष्ठा, तीर्थयात्रा आदि परिस्थितियों में नववधू का द्विरागमन दोषरहित है।
  • ऋतुवती वधू मंत्रदीक्षा लेना चाहे तो शुक्रोदय में यह शुभ माना जाता है।
  • प्रसूति स्नान के अलावा अन्य शुभ कार्य गुरु–शुक्र अस्तकाल में वर्जित माने गए हैं।
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गुरु–शुक्र अस्तकाल - फोटो : adobe stock
गुरु–शुक्र अस्तकाल में निम्न अंतर्दशाएं कष्टप्रद मानी गई हैं:
  • गुरु में गुरु की अंतर्दशा
  • शुक्र में शुक्र की अंतर्दशा
  • गुरु में शुक्र की अंतर्दशा
  • शुक्र में गुरु की अंतर्दशा
  • शुक्र में शनि की तथा शनि में शुक्र की अंतर्दशा

अन्य ग्रहों में गुरू एवं शुक्र की अंतर्दशाएं भी अशुभ फल दे सकती हैं। विधवा अथवा परित्यक्ता स्त्री यदि पुनर्विवाह करे तो गुरु–शुक्र अस्त, वेध, लग्न शुद्धि एवं विवाह-विहित मास आदि का कोई दोष नहीं लगता।

अन्त में महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट सनातन परंपराओं, वैदिक ज्ञान और जनकल्याण के लिए निरंतर समर्पित रहा है तथा भविष्य में भी समाज को शुद्ध, प्रामाणिक और वैज्ञानिक ज्योतिषीय मार्गदर्शन प्रदान करता रहेगा।

महंत रोहित शास्त्री (ज्योतिषाचार्य)
अध्यक्ष, श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट (पंजीकृत)
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