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Mata Sheetla Vahan: शीतला माता का वाहन आखिर गधा क्यों है, जानें इससे जुड़ी पौराणिक कथा

Tue, 10 Mar 2026 06:11 PM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sheetala Mata Vahan: धार्मिक मान्यता है कि माता शीतला की विधि-विधान से पूजा करने से संक्रामक रोगों से बचाव होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर माता शीतला का वाहन गधा ही क्यों माना गया है। 
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Mata Sheetala Ki Sawari - फोटो : adobe stock
Mata Sheetala Ki Sawari: हिंदू धर्म में माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। विशेष रूप से चेचक और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए माता शीतला की आराधना की जाती है। हर वर्ष चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का व्रत और पूजा की जाती है।

साल 2026 में शीतला अष्टमी 11 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु माता शीतला की पूजा करके परिवार की अच्छी सेहत और रोगों से सुरक्षा की कामना करते हैं। माता शीतला की प्रतिमा या चित्रों में उन्हें गधे पर सवार दिखाया जाता है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर माता शीतला का वाहन गधा ही क्यों माना गया है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। 

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गधा किसका प्रतीक है? - फोटो : Adobe Stock
माता शीतला का वाहन गधा क्यों माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गधा मेहनत, धैर्य और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है। यह पशु कठिन परिस्थितियों में भी लगातार काम करता रहता है और आसानी से हार नहीं मानता। माता शीतला रोगों से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं, इसलिए उनका वाहन गधा यह संदेश देता है कि बीमारी या कठिन समय में व्यक्ति को धैर्य और सहनशीलता बनाए रखनी चाहिए।
 
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स्वच्छता और स्वास्थ्य का संदेश - फोटो : amar ujala
स्वच्छता और स्वास्थ्य का संदेश
माता शीतला का स्वरूप स्वास्थ्य, स्वच्छता और रोगों से बचाव का प्रतीक माना जाता है। उनके हाथों में झाड़ू, कलश और सूप जैसे प्रतीक दिखाई देते हैं। झाड़ू को साफ-सफाई का प्रतीक माना जाता है, जो यह संकेत देता है कि स्वच्छता बनाए रखने से कई बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। माना जाता है कि गंदगी के कारण ही कई तरह के रोग फैलते हैं, इसलिए शीतला अष्टमी के दिन घर और आसपास की सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।
 

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माता शीतला से जुड़ी पौराणिक कथा - फोटो : amar ujala
माता शीतला से जुड़ी पौराणिक कथा
माता शीतला के गधे की सवारी से जुड़ी एक लोककथा भी प्रचलित है। मान्यता है कि एक बार माता शीतला एक गांव में पहुंचीं। वहां एक कुम्हार महिला ने बहुत श्रद्धा के साथ उनकी सेवा की। उस महिला के पास माता को बैठाने के लिए कोई साधन नहीं था, इसलिए उसने अपना गधा माता को अर्पित कर दिया। कहा जाता है कि उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता शीतला ने उसी गधे को अपना वाहन बना लिया।
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शीतला अष्टमी का महत्व - फोटो : adobe stock
शीतला अष्टमी का महत्व
शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा कर उनसे परिवार की सेहत और रोगों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। कई स्थानों पर इस दिन ठंडे या बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यता है कि माता शीतला की विधि-विधान से पूजा करने से संक्रामक रोगों से बचाव होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। 


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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