वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को एक महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है। शनिदेव सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। यह एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते फिर इसके बाद राशि परिवर्तन करते हैं। ज्योतिष में शनि को न्याय और कर्मफल दाता माना गया है। शनि देव मौजूद समय में अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान हैं और 29 जून को इसी में रहते हुए वक्री होने जा रहे हैं। वक्री का मतलब उल्टी चाल से होता है। शनि देव 135 दिनों तक वक्री रहेंगे। शनि देव की वक्री चाल का सभी 12 राशियों पर प्रभाव अवश्य ही पड़ेगा, लेकिन तीन राशि के जातकों धन लाभ और भाग्य का साथ ज्यादा मिलेगा। आइए जानते हैं कौन सी हैं ये भाग्यशाली राशियां