Shani Vakri 2024: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर और चाल का विशेष महत्व होता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी कोई महत्वपूर्ण ग्रह अपनी राशि परिवर्तन करते हैं या फिर चाल में बदलाव करते हैं तो इसका असर सभी राशियों के जातकों पर पड़ता है। ग्रहों के गोचर का सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह का प्रभाव व्यक्ति के ऊपर पड़ता है। सभी ग्रहों में शनिदेव सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह होते हैं और चंद्रमा सबसे तेज गति से एक से दूसरी राशि में गोचर करते हैं। शनिदेव एक राशि से दूसरी राशि में अपना स्थान परिवर्तन करने के लिए करीब ढाई वर्षों का समय लेते हैं। ज्योतिष में शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफलदाता माना गया है। यह जातकों को उनको द्वारा किए गए कर्मों के आधार पर फल देते हैं। शनिदेव को दो राशियों का स्वामित्व प्राप्त है। मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह शनिदेव हैं। यह तुला राशि में उच्च के और मेष राशि में नीच के माने जाते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि जब भी अपनी राशि में बैठते हैं या फिर उच्च राशि में होते हैं तो सबसे अच्छा फल प्रदान करते हैं।
शनिदेव अभी अपनी स्वयं की राशि और मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान हैं। 29 जून 2024 को रात 11 बजकर 49 मिनट पर कुंभ राशि में वक्री हो जाएंगे,जहां 15 नवंबर 2024 तक वक्री रहेंगे। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी कोई ग्रह आगे चलने के बजाय उल्टा चलता है तो वक्री चाल कहा जाता है। शनि के वक्री होने से कुछ राशि वालों को अच्छा लाभ मिलने के संकेत हैं।
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