शनिदेव 18 सितंबर को दोपहर 2:15 पर मार्गी हुए थे। मकर और
कुंभ राशि के स्वामी शनि तुला राशि में उच्च के होते हैं। शनि महाराज 30 अप्रैल को सुबह 6:20 पर वक्री हुए थे। इनका वक्री मार्गी होना फलित ज्योतिष के साथ-साथ मेदिनी ज्योतिष के लिए भी बड़ी घटना है क्योंकि, वक्री शनि जातकों के जीवन में भारी उतार-चढ़ाव लाते हैं किंतु मार्गी होने पर इनके अशुभ प्रभाव में कुछ कमी आ जाती है और दृष्टि भी अपेक्षाकृत शीतल हो जाती है। शनिदेव 26 जनवरी 2020 को मार्गी अवस्था में ही अपनी स्वयं की राशि
मकर में प्रवेश करेंगे। सभी 12 राशियों पर इनके मार्गी होने का कैसा प्रभाव साल 2019 के बाकी बचे महीने के लिए होगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
शनि के प्रकोप से हैं परेशान? 251 रुपये में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से जानिए शनि देव को प्रसन्न करने के समाधान, अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)