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21 या 22 सितंबर कब है सर्व पितृ अमावस्या? जानें कुतुप व रौहिण मुहूर्त का समय

Wed, 03 Sep 2025 06:33 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sarva Pitru Amavasya: आश्विन माह की अमावस्या तिथि 21 सितंबर की रात 12 बजकर 16 मिनट पर शुरू होकर 22 सितंबर की देर रात 1 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। इस दिन पितरों की पूजा और श्राद्ध कर्म विशेष महत्व रखते हैं।
 
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सर्वपितृ अमावस्या 2025 - फोटो : अमर उजाला
Sarva Pitru Amavasya 2025: पितृ पक्ष हिंदू धर्म में एक अत्यंत पावन और श्रद्धा से परिपूर्ण समय होता है, जिसमें हम अपने पूर्वजों को स्मरण करते हुए उनका तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करते हैं। यह 15 दिवसीय अवधि हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से अश्विन मास की अमावस्या तक चलती है। इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 से हो रही है।
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इस दौरान विशेष रूप से सर्वपितृ अमावस्या, जो इस वर्ष पितृ पक्ष का अंतिम दिन है, अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक किए गए कर्म और श्रद्धा से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। यदि आप इस दिन कुछ विशेष कार्य करते हैं, तो पितरों की कृपा प्राप्त हो सकती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
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सर्वपितृ अमावस्या - फोटो : freepik
सर्वपितृ अमावस्या के शुभ मुहूर्त 
  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 38 मिनट से 1 बजकर 27 मिनट तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से 3 बजकर 53 मिनट तक
इन शुभ समयों में यदि आप अपने पूर्वजों को श्राद्ध और तर्पण करते हैं, तो माना जाता है कि उन्हें शांति मिलती है और आप उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
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पितृ पक्ष 2025 - फोटो : freepik
सर्वपितृ अमावस्या उपाय
  • सर्वपितृ अमावस्या के दिन कुछ खास कार्य करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है, जिससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान अवश्य करें।
  • सर्वपितृ अमावस्या के दिन गाय, कुत्ते, कौवा, देवता और चींटी के लिए भोजन निकालना भी बेहद पुण्यकारी होता है। साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराना और अपनी क्षमता अनुसार दान-दक्षिणा देना चाहिए। इस प्रकार के कर्म करने से पितरों की कृपा मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
  • इसके अलावा, पीपल के पेड़ की पूजा भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसे पितरों का निवास माना जाता है। इस दिन पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा करें और पेड़ के नीचे सरसों के तेल के दीपक में काले तिल डालकर जलाएं। आप मंदिर के बाहर भी पीपल का पौधा लगा सकते हैं। ऐसा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं और पितृदोष भी कम होता है।
  • इन सरल लेकिन प्रभावशाली उपायों से आप अपने पूर्वजों को सम्मान दे सकते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
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पितृ पक्ष 2025 - फोटो : freepik
सर्वपितृ अमावस्या महत्व
महालया अमावस्या पितृपक्ष की सबसे महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। इसे सर्वपितृ अमावस्या या विसर्जनी अमावस्या भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन उन सभी पितरों का तर्पण किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, या जिनके श्राद्ध विशेष तिथि पर नहीं हो सके।  इस दिन लोग विधिपूर्वक अपने पूर्वजों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करते हैं, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले और वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद दें। मान्यता है कि महालया अमावस्या पर पितरों की कृपा प्राप्त करने से पितृदोष दूर होता है, जिससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।  जो लोग नियमित श्राद्ध नहीं कर पाते, वे विशेष रूप से इस दिन अपने सभी पितरों को स्मरण कर तर्पण करते हैं। यह दिन पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का भी प्रतीक है।  संक्षेप में, महालया अमावस्या पितरों को सम्मान देने, उनके प्रति कृतज्ञता जताने और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने का एक अत्यंत पुण्यदायी अवसर होता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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