पिशाचमोचन कुंड क्यों है खास?
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पिशाचमोचन कुंड क्यों है खास?
वाराणसी का पिशाचमोचन कुंड अकाल मृत्यु से जुड़े कर्मकांडों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यहां नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध और पिंडदान जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। वहीं मणिकर्णिका घाट का संबंध काशी की प्राचीन मृत्यु और मोक्ष परंपरा से माना जाता है। कौन-सा कर्मकांड किस स्थान पर कराया जाए, यह मृत्यु की परिस्थिति, पारिवारिक परंपरा और पुरोहित की सलाह के अनुसार तय किया जा सकता है।
गयाजी में 45 वेदियों पर पिंडदान
पितृपक्ष में गयाजी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी और अक्षयवट समेत विभिन्न वेदियों पर पिंडदान की परंपरा है। पारंपरिक गया श्राद्ध में 45 वेदियों का उल्लेख मिलता है। परिवार की परंपरा और उपलब्ध समय के अनुसार एक, तीन, पांच या अधिक दिनों तक भी कर्मकांड किए जा सकते हैं।