पंचक ज्योतिषीय दृष्टिकोण से एक संवेदनशील अवधि है, जिसमें कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है। पंचक के दौरान कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है, क्योंकि इस अवधि में किए गए कार्यों के दोहराव का खतरा रहता है।
January Panchak 2025: वैदिक ज्योतिष में पंचक का विशेष महत्व है। पंचक पांच ऐसे नक्षत्रों का योग है, जो कुछ विशेष कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। पंचक ज्योतिषीय दृष्टिकोण से एक संवेदनशील अवधि है, जिसमें कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है। पंचक के दौरान कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है, क्योंकि इस अवधि में किए गए कार्यों के दोहराव का खतरा रहता है। जब चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करता है, तो धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण से पंचक की शुरुआत होती है। इसके बाद शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, और रेवती नक्षत्र आते हैं। चंद्रमा इन पांच नक्षत्रों में लगभग पांच दिन तक रहता है, और इन्हीं पांच नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है।
नक्षत्र चक्र और पंचक का संबंध
ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है, जो 12 राशियों में विभाजित हैं। प्रत्येक राशि में लगभग 2.25 नक्षत्र आते हैं। एक नक्षत्र 13 अंश 20 मिनट का होता है और इसके चार चरण होते हैं, प्रत्येक चरण 3 अंश 20 मिनट का होता है। जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशियों में गोचर करता है, तब पंचक का योग बनता है।
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पंचक का महत्व
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पंचक का महत्व
सनातन संस्कृति में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है। पंचक के दौरान अशुभ कार्यों को करने से बचा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इस समय किए गए कार्यों की पुनरावृत्ति पांच बार हो सकती है। यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, तो विशेष अनुष्ठान करना आवश्यक होता है। पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा करना वर्जित माना जाता है। पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्य जैसे भवन निर्माण, लकड़ी इकट्ठा करना, और ज्वलनशील सामग्री संग्रहित करना वर्जित होता है।
जनवरी में कब से शुरू हैं पंचक
इस महीने 3 जनवरी, शुक्रवार को सुबह 11:53 से शुरू हो जाएंगे और 7 जनवरी की शाम 5:44 बजे तक रहेंगे।
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पंचक के प्रकार
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पंचक के प्रकार
रोग पंचक- रविवार से शुरू होने वाले पंचक को रोग पंचक कहा जाता है। यह स्वास्थ्य समस्याओं और मानसिक परेशानियों को जन्म देता है।
राज पंचक- सोमवार से शुरू होने वाले पंचक को राज पंचक कहते हैं। यह पंचक सरकारी कामों में सफलता और संपत्ति लाभ के लिए शुभ माना जाता है।
अग्नि पंचक- मंगलवार से प्रारंभ होने वाले पंचक को अग्नि पंचक कहा जाता है। इस दौरान निर्माण कार्य, औजारों का उपयोग, और मशीनरी से संबंधित कार्य वर्जित होते हैं।
चोर पंचक- शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। इस समय यात्रा, व्यापार और सौदेबाजी से बचना चाहिए। इस बार शुक्रवार यानी 3 जनवरी से ही पंचक का आरंभ हो रहा है।
मृत्यु पंचक- शनिवार से प्रारंभ होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहते हैं। इस दौरान जोखिम भरे कार्यों और विवादों से बचना चाहिए।
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पंचक के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां
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पंचक के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां
धनिष्ठा नक्षत्र के पंचक में ज्वलनशील पदार्थ इकट्ठा न करें।
शव संस्कार से पहले विशेषज्ञ पंडित से परामर्श करें और विशेष अनुष्ठान करें।
दक्षिण दिशा की यात्रा न करें।
रेवती नक्षत्र में घर की छत का निर्माण या लेंटर डालना वर्जित है।
पंचक में किए जाने वाले शुभ कार्य
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पंचक में किए जाने वाले शुभ कार्य
यात्रा, मुंडन, व्यापार, और सौदेबाजी कुछ विशेष योगों में की जा सकती है।
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में स्थिर कार्य जैसे गृह प्रवेश, शांति पूजा और कृषि कार्य किए जा सकते हैं।
रेवती नक्षत्र में विवादों का समाधान, व्यापारिक सौदे और आभूषण खरीदारी शुभ मानी जाती है।
हालांकि बुधवार और गुरुवार से शुरू होने वाले पंचक उतने अशुभ नहीं माने जाते और इन दिनों शुभ कार्य किए जा सकते हैं। दरअसल, उचित मार्गदर्शन और ज्योतिषीय उपायों के साथ, पंचक में भी कुछ शुभ कार्यों को संपन्न किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।