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Nag Panchami Upay: नाग पंचमी पर राशि अनुसार करें ये खास उपाय, कुंडली में राहु-केतु दोष से मिलेगी राहत

Mon, 17 Aug 2026 11:14 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Nag Panchami 2026 Upay: नाग पंचमी पर शिव पूजा और कुछ विशेष उपाय करने से राहु-केतु से संबंधित अशुभ प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। आप अपनी राशि के अनुसार ये उपाय कर सकते हैं।
 
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नाग पंचमी राशि अनुसर उपाय - फोटो : AI
Nag Panchami Rashi Anusar Upay: ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है। कुंडली में इनकी स्थिति कमजोर या प्रतिकूल होने पर व्यक्ति को मानसिक उलझन, अस्थिरता और जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। कई बार निर्णय लेने में परेशानी, काम में असफलता और नकारात्मक विचार भी बढ़ सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में राहु-केतु से कालसर्प दोष का संबंध भी बताया गया है।

इस वर्ष 17 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। नाग पंचमी को नाग देवता और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन शिव पूजा और कुछ विशेष उपाय करने से राहु-केतु से संबंधित अशुभ प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। आप अपनी राशि के अनुसार ये उपाय कर सकते हैं।

नाग पंचमी पर राहु-केतु शांति के लिए राशि अनुसार उपाय
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मेष - फोटो : अमर उजाला
मेष: नाग पंचमी के दिन पानी में लाल पुष्प और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। भगवान शिव की आराधना करने से राहु-केतु के नकारात्मक प्रभावों से राहत मिलने की मान्यता है।
 
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वृषभ - फोटो : अमर उजाला
वृषभ: इस राशि के जातक महादेव को सफेद फूल चढ़ाएं। इसके बाद कच्चे दूध को जल में मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। शिव मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं।

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मिथुन - फोटो : अमर उजाला
मिथुन: मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं। नाग पंचमी पर शिव पूजा के बाद गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें। हरे वस्त्र, हरे फल और मूंग दाल का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही ‘ॐ रां राहवे नमः’ मंत्र का जाप करें।
 
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कर्क - फोटो : अमर उजाला
कर्क: कर्क राशि वाले नाग पंचमी पर भगवान शिव का रुद्राभिषेक करा सकते हैं। इसके बाद चांदी से बने नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के बाद इसे बहते जल में प्रवाहित किया जाता है।
 
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सिंह - फोटो : daily rashifal
सिंह: यदि राहु-केतु के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहती हैं, तो नाग पंचमी पर तांबे के पात्र में गेहूं भरकर दान करें। सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद भगवान शिव की पूजा करें।
 
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कन्या - फोटो : अमर उजाला
कन्या: राहु-केतु की शांति के लिए बहते पानी में कच्चा कोयला प्रवाहित करने का उपाय बताया गया है। इसके साथ पशु-पक्षियों की सेवा करें और शिवलिंग पर जल अर्पित करें। ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव कम होने की मान्यता है।
 

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तुला - फोटो : अमर उजाला
तुला: नाग पंचमी के दिन भगवान शिव के दर्शन करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न या भोजन का दान करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे राहु-केतु से जुड़े दोषों की शांति में सहायता मिल सकती है।
 

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वृश्चिक - फोटो : अमर उजाला
वृश्चिक: इस राशि के जातक नाग पंचमी पर शिव आराधना के बाद सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं। नियमित रूप से धार्मिक पाठ और शिव पूजा करने से नकारात्मक प्रभावों से राहत मिलने की मान्यता है।
 

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धनु - फोटो : अमर उजाला
धनु: धनु राशि वालों को नाग पंचमी पर भगवान शिव के साथ पूरे शिव परिवार की पूजा करनी चाहिए। इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करें और विष्णु मंदिर में हल्दी तथा चने की दाल का दान करें।
 

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मकर - फोटो : अमर उजाला
मकर: मकर राशि के जातक नाग पंचमी पर काले कुत्ते को गुड़ और रोटी खिलाएं। शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना भी ज्योतिषीय उपायों में शामिल है।
 

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कुंभ - फोटो : अमर उजाला
कुंभ: राहु-केतु की शांति के लिए जरूरतमंद लोगों को काला कंबल, लोहे की वस्तुएं या स्टील के बर्तन दान करें। इसके बाद भगवान शिव के सामने बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
 

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मीन - फोटो : अमर उजाला
मीन: नाग पंचमी के दिन जल में थोड़ा केसर मिलाकर उससे शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद एक नारियल बहते जल में प्रवाहित करने का उपाय बताया जाता है।
 
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राहु-केतु दोष से राहत के सामान्य उपाय - फोटो : amar ujala
राहु-केतु दोष से राहत के सामान्य उपाय
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु से संबंधित दोष बताए जाते हैं, वे राहुकाल में भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। इस दौरान शिवलिंग पर जल चढ़ाकर महादेव का ध्यान और मंत्र जाप करें। मान्यता है कि शिव आराधना से राहु-केतु के अशुभ प्रभावों को शांत करने में सहायता मिलती है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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