वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को केवल एक खगोलीय पिंड नहीं, बल्कि मनुष्य की बुद्धि, तर्क शक्ति और वाणी का सूक्ष्म प्रतिनिधि माना गया है। जन्म कुंडली में बुध जिस भाव, राशि और ग्रह-संयोग में स्थित होता है, वही व्यक्ति के बोलने, सोचने और निर्णय लेने के तरीके को आकार देता है। इसलिए कहा गया है कि “मनुष्य की पहचान उसके शब्दों से होती है और शब्दों की दिशा बुध से।”
बुध ग्रह का स्वभाव तटस्थ माना गया है अर्थात यह जिस ग्रह के साथ युति करता है, उसी के गुण ग्रहण कर लेता है। यही कारण है कि कभी किसी की वाणी अत्यंत मधुर और प्रभावशाली होती है, तो कभी वही वाणी अनजाने में विवाद का कारण बन जाती है।