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कितने प्रकार के होते हैं मांगलिक दोष, जानें दोष दूर करने के उपाय

Fri, 10 Apr 2026 03:30 PM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि जन्म कुंडली के पहले, चौथे, सातवें और बारहवें भाव में मंगल ग्रह स्थित हो तो मंगल दोष माना जाता है। यह दोष केवल एक ही प्रकार का नहीं होता बल्कि इसे चार प्रकार का बताया गया है। प्रत्येक प्रकार व्यक्ति के जीवन को अलग-अलग ढंग से प्रभावित करता है।
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मांगलिक दोष उपाय - फोटो : amar ujala
Mangalik Dosh Upay:  ऐसा माना जाता है कि यदि कुंडली में मंगल दोष हो तो यह विवाह में बाधाएं उत्पन्न कर सकता है। इसके कारण वैवाहिक जीवन में तनाव और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि जन्म कुंडली के पहले, चौथे, सातवें और बारहवें भाव में मंगल ग्रह स्थित हो तो मंगल दोष माना जाता है। यह दोष केवल एक ही प्रकार का नहीं होता बल्कि इसे चार प्रकार का बताया गया है। प्रत्येक प्रकार व्यक्ति के जीवन को अलग-अलग ढंग से प्रभावित करता है। कुछ लोगों के लिए इसका प्रभाव अधिक तीव्र हो सकता है तो वहीं दूसरों के लिए यह कम प्रभावी हो सकता है।
ज्योतिषियों के अनुसार यदि कुंडली में मंगल दोष प्रबल हो तो इसके निवारण हेतु कुछ सरल उपाय उपलब्ध हैं। यदि इन उपायों का सही ढंग से पालन किया जाए तो इस दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति लाई जा सकती है। यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि मंगल दोष के विभिन्न प्रकार कौन-कौन से हैं। ये किस प्रकार उत्पन्न होते हैं और इनके निवारण हेतु कौन-से उपाय करने चाहिए।
 
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मांगलिक दोष के प्रकार - फोटो : Freepik
मांगलिक दोष के प्रकार 
मांगलिक दोष को ज्योतिष में अलग-अलग स्थितियों के आधार पर चार प्रकारों में बांटा गया है और हर प्रकार का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर अलग तरह से पड़ता है।

आंशिक मांगलिक दोष: जब कुंडली में मंगल ग्रह का प्रभाव बहुत ज्यादा तीव्र नहीं होता बल्कि मध्यम स्तर का होता है तो उसे आंशिक मांगलिक दोष कहा जाता है। ऐसे में व्यक्ति के जीवन में मांगलिक दोष के हल्के प्रभाव देखने को मिलते हैं। विवाह में थोड़ी देरी या छोटी-मोटी परेशानियां आ सकती हैं, लेकिन स्थिति बहुत गंभीर नहीं होती।

नवांश मांगलिक दोष: यह दोष नवांश कुंडली से संबंधित होता है जो वैवाहिक जीवन का गहराई से विश्लेषण करती है। यदि नवांश कुंडली में मंगल ग्रह विवाह से जुड़े भाव को प्रभावित करता है तो इसे नवांश मांगलिक दोष कहा जाता है। इसका असर शादी के बाद के जीवन पर अधिक दिखाई देता है, जैसे पति-पत्नी के बीच मतभेद या तालमेल की कमी।

चंद्र मांगलिक दोष: जब चंद्र लग्न से गिनती करते हुए मंगल ग्रह पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है, तब चंद्र मांगलिक दोष बनता है। चंद्र मन और भावनाओं का कारक है इसलिए इस दोष का असर व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक जीवन पर पड़ता है। इससे रिश्तों में तनाव,अस्थिरता या भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

पूर्ण मांगलिक दोष: यह मांगलिक दोष का सबसे प्रभावशाली और गंभीर रूप माना जाता है। जब कुंडली में मंगल ग्रह बहुत अधिक शक्तिशाली स्थिति में होता है और अन्य क्रूर ग्रहों के साथ मिलकर बैठता है तब पूर्ण मांगलिक दोष बनता है। इसका असर वैवाहिक जीवन जैसे संबंधों में अधिक तनाव, विवाद या देरी से विवाह पर गहरा पड़ सकता है। हालांकि उचित उपायों और सही मिलान से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।
 
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मांगलिक दोष उपाय - फोटो : amarujala
मांगलिक दोष उपाय 
  •  यदि कुंडली में मंगल दोष हो लेकिन वह नवमांश कुंडली में दिखाई न दे, तो वैवाहिक जीवन पर इसका प्रभाव कम हो सकता है।
  • यदि मंगल दोष प्रबल हो तो इसके नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए उचित उपाय करना आवश्यक है।
  • किसी अनुभवी ज्योतिषी से अपनी कुंडली की जांच करवाना और उचित मार्गदर्शन प्राप्त करना बेहतर होता है।
  • ऐसा माना जाता है कि मंगलवार का व्रत रखने से मंगल दोष को कम करने में मदद मिलती है।
  • सुबह स्नान करके, स्वच्छ लाल वस्त्र धारण करके पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है।
  • चना और गुड़ का दान करने से मंगल दोष के प्रभावों को कम किया जा सकता है।
  • यदि संभव हो, तो 21 मंगलवार तक व्रत रखने से उत्तम परिणाम प्राप्त होते हैं।
  • मंगल के बीज मंत्र "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" का नियमित रूप से जाप करना चाहिए।
  • कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करने से मंगल के प्रभाव को शांत किया जा सकता है।
  • मंगलवार के दिन लाल वस्त्र में मसूर की दाल बांधकर दान करना एक अत्यंत उत्तम उपाय है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 
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