मांगलिक दोष के प्रकार
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मांगलिक दोष के प्रकार
मांगलिक दोष को ज्योतिष में अलग-अलग स्थितियों के आधार पर चार प्रकारों में बांटा गया है और हर प्रकार का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर अलग तरह से पड़ता है।
आंशिक मांगलिक दोष: जब कुंडली में मंगल ग्रह का प्रभाव बहुत ज्यादा तीव्र नहीं होता बल्कि मध्यम स्तर का होता है तो उसे आंशिक मांगलिक दोष कहा जाता है। ऐसे में व्यक्ति के जीवन में मांगलिक दोष के हल्के प्रभाव देखने को मिलते हैं। विवाह में थोड़ी देरी या छोटी-मोटी परेशानियां आ सकती हैं, लेकिन स्थिति बहुत गंभीर नहीं होती।
नवांश मांगलिक दोष: यह दोष नवांश कुंडली से संबंधित होता है जो वैवाहिक जीवन का गहराई से विश्लेषण करती है। यदि नवांश कुंडली में मंगल ग्रह विवाह से जुड़े भाव को प्रभावित करता है तो इसे नवांश मांगलिक दोष कहा जाता है। इसका असर शादी के बाद के जीवन पर अधिक दिखाई देता है, जैसे पति-पत्नी के बीच मतभेद या तालमेल की कमी।
चंद्र मांगलिक दोष: जब चंद्र लग्न से गिनती करते हुए मंगल ग्रह पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है, तब चंद्र मांगलिक दोष बनता है। चंद्र मन और भावनाओं का कारक है इसलिए इस दोष का असर व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक जीवन पर पड़ता है। इससे रिश्तों में तनाव,अस्थिरता या भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
पूर्ण मांगलिक दोष: यह मांगलिक दोष का सबसे प्रभावशाली और गंभीर रूप माना जाता है। जब कुंडली में मंगल ग्रह बहुत अधिक शक्तिशाली स्थिति में होता है और अन्य क्रूर ग्रहों के साथ मिलकर बैठता है तब पूर्ण मांगलिक दोष बनता है। इसका असर वैवाहिक जीवन जैसे संबंधों में अधिक तनाव, विवाद या देरी से विवाह पर गहरा पड़ सकता है। हालांकि उचित उपायों और सही मिलान से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।