Shani Nakshtra Gochar: ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है। एक राशि से दूसरी राशि में जाने में शनि को लगभग ढाई साल का समय लगता है, और नक्षत्र परिवर्तन में भी इन्हें काफी वक्त लगता है। बीते 17 मई को शनि देव ने रेवती नक्षत्र में प्रवेश किया था, और यह नक्षत्र बुध ग्रह के स्वामित्व में आता है। यानी फिलहाल शनि देव बुध के नक्षत्र में विराजमान हैं, और वे अगले तीन महीनों तक इसी नक्षत्र में बने रहेंगे। इसके बाद 9 अक्टूबर 2026 को शनि देव रेवती नक्षत्र से निकलकर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। शनि का बुध स्वामित्व वाले रेवती नक्षत्र में होना कई राशियों के लिए शुभ साबित हो सकता है। रेवती नक्षत्र को बुद्धि और संयम का प्रतीक माना जाता है, जबकि शनि को अनुशासन का कारक ग्रह कहा जाता है। इन दोनों के संयुक्त प्रभाव से कुछ राशियों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। चूंकि बुध ग्रह बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक माना जाता है, इसलिए इस दौरान कुछ भाग्यशाली राशियों को व्यापार में फायदा हो सकता है। साथ ही कर्मफलदाता शनि की कृपा से मेहनत का उचित फल भी मिल सकता है। ज्योतिष गणना के अनुसार शनि के रेवती नक्षत्र में रहने से मेष, कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। आइए जानते हैं कि इन तीनों राशियों पर इसका क्या असर पड़ेगा।