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Nirjala Ekadashi Vrat 2026: कब रखा जाएगा निर्जला एकादशी का व्रत ? जानें तिथि से लेकर व्रत पारण तक की जानकारी

Tue, 19 May 2026 11:26 AM IST
Megha Kumari धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Nirjala Ekadashi Vrat 2026: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर निर्जला एकादशी मनाई जाती हैं। मान्यता है कि, जो श्रद्धालु सच्चे मन से यह व्रत रखते हैं, उन्हें वर्षभर की 24 एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। 
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Nirjala Ekadashi Vrat 2026 - फोटो : अमर उजाला
Nirjala Ekadashi Vrat 2026: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती हैं। यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी सबसे कठिन और पुण्यदायी व्रत है, क्योंकि इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास रखने का विधान है। जो श्रद्धालु सच्चे मन से यह व्रत रखते हैं, उन्हें वर्षभर की 24 एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं कि, इस साल यह व्रत कब रखा जाएगा।
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Nirjala Ekadashi 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
निर्जला एकादशी 2026 कब है ?
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून 2026 को शाम 6 बजकर 12 मिनट पर होगा। वहीं इस तिथि का समापन 25 जून 2026 को रात 8 बजकर 9 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत गुरुवार, 25 जून 2026 को रखा जाएगा। व्रत का पारण 26 जून को सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट के बीच करना शुभ रहेगा।

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Nirjala Ekadashi Vrat 2026 - फोटो : freepik
निर्जला एकादशी पूजा विधि
  • निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। 
  • पूजा के दौरान भगवान को पीले फूल, तुलसी दल और मिठाई अर्पित करें। 
  • घी का दीप जलाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। यह बेहद शुभ माना जाता है।
  • शाम के समय दीपदान करें और भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें। 
  • निर्जला एकादशी पर जल से भरा कलश, छाता, वस्त्र और फल का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। 
  • इसके बाद पूरे दिन व्रत रखें और अगले दिन विधि-विधान से ब्राह्मण भोजन कराने के बाद व्रत पारण करें।
 

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Nirjala Ekadashi Vrat 2026 - फोटो : adobe
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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