देवगुरु बृहस्पति आज रात्रि पश्चात 3 बजकर 48 मिनट पर अतिचारी होकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जहां ये पहले से ही विराजमान शनि और मंगल के साथ ही युति करेंगे। अपनी मकर राशि की 3माह की यात्रा के पश्चात गुरु वक्री अवस्था में पुनः 30 जून की प्रातः धनु राशि में प्रवेश करेंगे। यद्यपि बृहस्पति अतिचारी भाव में अपनी नीच राशि में प्रवेश कर रहे हैं किंतु शनिदेव का अपने घर में विराजमान रहने से इनका नीच भंगयोग बनेगा और यहीं पर मंगल भी अपनी उच्चराशि में विराजमान है जिसके फलस्वरूप त्रिग्रही योग का निर्माण होगा। स्वतंत्र भारत की वृषभ लग्न की जन्म कुंडली में बृहस्पति नवम भाग्य भाव में प्रवेश करेंगे और शुक्र के साथ नव-पंचम योग बनाएंगे। इस भाव में जाने से बृहस्पति की अमृत दृष्टिभारत के लग्नभाव पर पड़ेगी, जिसके फलस्वरूप काफी प्रबल संभावना है कि भारत में बढ़ रहे कोरोना जैसी महामारी से कुछ राहत मिल सके।
किंतु ऐसी भी संभावना है कि क्योंकि, गुरु के राशि परिवर्तन के परिणामस्वरूप केतु अपनी उच्चराशि धनु में अकेले पड़ जाएंगे जो भारत की लग्न कुंडली से अष्टम मृत्यु भाव में और राशि कर्क से छठे ऋण रोग, एवं शत्रु भाव में पहले से विराजमान हैं, इनके अति अशुभ प्रभाव से कहीं यह महामारी आमजनता में न फैल जाए क्योंकि केतु जनता के भी कारक हैं इसलिए आज के ग्रह गोचर में आया हुआ यह परिवर्तन भारतवर्ष और यहां की जनता के लिए दशा दिशा तय करेगा। हो सकता है कि आने वाले सप्ताह में कोरोना के मरीजों की संख्या में कमी आए और यह भी हो सकता है कि मरीजों की संख्या में एकाएक वृद्धि होने शुरू हो जाए क्योंकि ऐसी महामारी पर कोई सत्य परक् ज्योतिषीय शोध नहीं हुआ है इसलिए जनमानस को चाहिए कि इस महामारी से बचने के लिए सरकार द्वारा बताए गए सभी नियमों का पालन करें और जहांतक संभव हो अपने घर में ही सुरक्षित रहें। मंगल, गुरु और शनि की एक साथ युति का फलित ज्योतिष के अनुसार आम जनमानस पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।