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Jaya Ekadashi 2023: जया एकादशी व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण समय

Wed, 01 Feb 2023 09:31 AM IST
आशिकी पटेल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जया एकादशी व्रत दिलाता है पिशाच योनि से मुक्ति - फोटो : अमर उजाला
Jaya Ekadashi 2023 Vrat and Puja Vidhi: पुराणों में माघ महीने को बड़ा ही पुण्यदायी माना गया गया है। इस माह में स्नान और दान करना बेहद उत्तम माना जाता है। कहा जाता है कि माघ महीने में स्नान, दान और व्रत का फल अन्य महीनों से अधिक मिलता है। इसके अलावा इस महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का भी विशेष महत्व बताया गया है। माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन जया एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। ये व्रत आज यानी 01 फरवरी को रखा जा रहा है। जया एकादशी का जिक्र करते हुए शास्त्रों में बताया गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा पूर्वक इस व्रत को करता है उसे मृत्यु के बाद भूत-प्रेत नहीं बनना पड़ता है। चलिए जानते हैं जया एकादशी व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पारण समय...

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जया एकादशी व्रत दिलाता है पिशाच योनि से मुक्ति - फोटो : iStock
कब है जया एकादशी 2023 ?
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 31 जनवरी दिन मंगलवार को सुबह 11 बजकर 55 मिनट से हो रही है। ये तिथि अगले दिन 01 फरवरी, बुधवार को दोपहर 02 बजकर 01 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि को देखते हुए जया एकादशी व्रत 01 फरवरी बुधवार को रखा जाएगा।
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जया एकादशी व्रत दिलाता है पिशाच योनि से मुक्ति - फोटो : अमर उजाला
जया एकादशी पूजा मुहूर्त 2023
01 फरवरी को प्रातः काल से लेकर सुबह 8 बजकर 30 मिनट तक पूजा का उत्तम मुहूर्त है। इस समय आप पूजा कर सकते हैं। साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 07 बजकर 10 मिनट से प्रारंभ है और अगले दिन 02 फरवरी को प्रात: 03 बजकर 23 मिनट तक है। इसके अलावा जया एकादशी को इंद्र योग भी बना है। इंद्र योग इस दिन प्रात: काल से लेकर सुबह 11 बजकर 30 मिनट तक है। इंद्र योग भी शुभ योग होता है।

 

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जया एकादशी व्रत दिलाता है पिशाच योनि से मुक्ति - फोटो : अमर उजाला
जया एकादशी व्रत 2023 का पारण समय
02 फरवरी को जया एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा। इस दिन व्रत पारण का समय सुबह 07 बजकर 09 मिनट से सुबह 09 बजकर 19 मिनट तक है।  
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जया एकादशी व्रत दिलाता है पिशाच योनि से मुक्ति - फोटो : iStock
जया एकादशी व्रत विधि
  • एकादशी व्रत वाले दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें।
  • व्रत का संकल्प लें और फिर विष्णु जी की आराधना करें।
  • भगवान विष्ण़ु को पीले फूल अर्पित करें।
  • घी में हल्दी मिलाकर भगवान विष्ण़ु का दीपक करें।
  • पीपल के पत्ते पर दूध और केसर से बनी मिठाई रखकर भगवान को चढ़ाएं।
  • एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं।
  • भगवान विष्णु को केले चढ़ाएं और गरीबों को भी केले बांट दें।
  • भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी का पूजन करें और गोमती चक्र और पीली कौड़ी भी पूजा में रखें।
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जया एकादशी व्रत दिलाता है पिशाच योनि से मुक्ति - फोटो : iStock
जया एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, इन्द्र की सभा में एक गंधर्व गीत गा रहा था। परन्तु उसका मन अपनी प्रिया को याद करने लगा। इस कारण से गाते समय उसकी लय बिगड़ गई। इस पर इन्द्र ने क्रोधित होकर गंधर्व और उसकी पत्नी को पिशाच योनि में जन्म लेने का श्राप दे दिया। पिशाच योनी में जन्म लेकर पति पत्नी कष्ट भोग रहे थे। संयोगवश माघ शुक्ल एकादशी के दिन दुःखों से व्याकुल होकर इन दोनों ने कुछ भी नहीं खाया और रात में ठंड की वजह से सो भी नहीं पाये। इस तरह अनजाने में उनसे जया एकादशी का व्रत हो गया। इस व्रत के प्रभाव से दोनों श्राप मुक्त हो गए और पुनः अपने वास्तविक स्वरूप में लौटकर स्वर्ग पहुंच गये। देवराज इन्द्र ने जब गंधर्व को वापस इनके वास्तविक स्वरूप में देखा तो वे हैरान हुए। गन्धर्व और उनकी पत्नी ने बताया कि उनसे अनजाने में जया एकादशी का व्रत हो गया। इस व्रत के पुण्य से ही उन्हें पिशाच योनि से मुक्ति मिली है।
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