ग्रह नक्षत्र
जातक का पंचम भाव पुत्र, विद्या, बुद्धि, यंत्र, मंत्र, तन्त्र, प्रबंध, राज, चिंता आदि को दर्शाता है। यदि जातक के इस भाव पर पाप ग्रह का प्रभाव हो, तो जातक के अवसाद ग्रस्त होने की आशंका अत्यधिक बढ़ जाती है। छठा, आठवां और बारहवां भाव इन्हें त्रिक भी कहते हैं। इससे चिंता, उधारी, तनाव, दुश्मन और मृत्यु आदि का विचार किया जाता है। निराशा, अवसाद एवं आत्महत्या में इन भावों का इनके स्वामी का महत्वपूर्ण योगदान है। लग्न का स्वामी द्वितीय भाव में तृतीय और एकादश के स्वामी के साथ और अष्टम भाव का स्वामी अष्टम में हो, तो जातक के आत्महत्या कर लेने की आशंका बढ़ जाती है।