ज्योतिष शास्त्र में हंस महापुरुष योग को पंच महापुरुष योगों में से एक सबसे शुभ और ताकतवर योग माना गया है।
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कैसे बनता है हंस महापुरुष योग?
ज्योतिष शास्त्र में हंस महापुरुष योग को पंच महापुरुष योगों में से एक सबसे शुभ और ताकतवर योग माना गया है। यह योग तब बनता है जब गुरु ग्रह जन्म कुंडली के केंद्र स्थानों यानी पहला (लग्न), चौथा, सातवां या दसवें भाव में स्थित हो। साथ ही बृहस्पति को उन राशियों में होना चाहिए जहाँ वह सबसे ज़्यादा ताकतवर होता है, जैसे कि कर्क राशि (उच्च की राशि), धनु या मीन राशि (जो उसकी स्वयं की राशियां हैं)।
जब ये दोनों स्थितियां एक साथ पूरी होती हैं, तब कुंडली में हंस महापुरुष योग का निर्माण होता है। यह योग जिस व्यक्ति की कुंडली में होता है, वह बेहद बुद्धिमान, सम्मानित, और धार्मिक प्रवृत्ति का होता है। ऐसे व्यक्ति को समाज में विशेष प्रतिष्ठा और आदर मिलता है। जीवन में सुख, समृद्धि और नैतिक मूल्यों की भरपूरता रहती है। हंस योग केवल भौतिक तरक्की तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास में भी अहम भूमिका निभाता है।