ज्योतिष में समय-समय पर ग्रहों की चाल में बदलाव आता है। ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं, इसके अलावा ग्रह समय-समय पर नक्षत्र परिवर्तन भी करते हैं। ज्योतिष में गुरु ग्रह और पुष्य नक्षत्र का विशेष महत्व होता है। जहां गुरु को सबसे शुभ ग्रह और शुभ फल देने वाला ग्रह माना जाता है, को वहीं पुष्य को नक्षत्रों का राजा माना जाता है। जल्द ही गुरु पुष्य नक्षत्र में गोचर करने वाले हैं जिसे ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत ही शुभ और दुर्लभ माना जाता है। आपको बता दें कि देवगुरु बृहस्पति अभी अपनी उच्च राशि कर्क में है, जो 18 जून को शनि के स्वामित्व वाले नक्षत्र पुष्य में प्रवेश करेंगे। पुष्य नक्षत्र के देवता स्वयं देवगुरु बृहस्पति हैं। गुरु इस नक्षत्र में 18 अगस्त 2026 तक रहेंगे। गुरु के अपनी उच्च राशि कर्क में रहते हुए और पुष्य नक्षत्र में गोचर करने से कई राशियों के लिए अच्छे संकेत हैं। आइए जानते हैं गुरु के गोचर करने से किन राशियों को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा।