Guru Chandal Yog 2026: वैदिक ज्योतिष में कई प्रकार के ग्रह योग बताए गए हैं, जिनमें कुछ शुभ फल देते हैं तो कुछ जीवन में चुनौतियां बढ़ा सकते हैं। ऐसा ही एक योग है गुरु चांडाल योग, जिसे अशुभ योगों में गिना जाता है। यह तब बनता है जब बृहस्पति और राहु एक ही स्थान पर आ जाते हैं। माना जाता है कि यह योग व्यक्ति के स्वभाव, निर्णय क्षमता और जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर सकता है। आइए समझते हैं कि यह योग क्या होता है, इसके संभावित प्रभाव क्या हैं और इससे जुड़े पारंपरिक उपाय कौन-से हैं।
गुरु चांडाल योग क्या है?
जब जन्म कुंडली में बृहस्पति और राहु एक ही भाव में स्थित होते हैं, तब गुरु चांडाल योग का निर्माण होता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यदि यह योग लग्न, पंचम या नवम भाव में बने तो इसका असर अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। हालांकि इसका प्रभाव हर व्यक्ति पर समान नहीं होता, क्योंकि यह पूरी कुंडली और अन्य ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करता है।