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Guru Chandal Yog: कुंडली में कब बनता है गुरु चांडाल योग ? जानें इसके दुष्प्रभाव और बचाव के उपाय

Fri, 17 Jul 2026 03:25 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Guru Chandal Yog 2026: माना जाता है कि गुरु चांडाल योग व्यक्ति के स्वभाव, निर्णय क्षमता और जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर सकता है। आइए समझते हैं कि यह योग क्या होता है, इसके संभावित प्रभाव क्या हैं और इससे जुड़े पारंपरिक उपाय कौन-से हैं।
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गुरु चांडाल योग - फोटो : AI
Guru Chandal Yog 2026: वैदिक ज्योतिष में कई प्रकार के ग्रह योग बताए गए हैं, जिनमें कुछ शुभ फल देते हैं तो कुछ जीवन में चुनौतियां बढ़ा सकते हैं। ऐसा ही एक योग है गुरु चांडाल योग, जिसे अशुभ योगों में गिना जाता है। यह तब बनता है जब बृहस्पति और राहु एक ही स्थान पर आ जाते हैं। माना जाता है कि यह योग व्यक्ति के स्वभाव, निर्णय क्षमता और जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर सकता है। आइए समझते हैं कि यह योग क्या होता है, इसके संभावित प्रभाव क्या हैं और इससे जुड़े पारंपरिक उपाय कौन-से हैं।

गुरु चांडाल योग क्या है?
जब जन्म कुंडली में बृहस्पति और राहु एक ही भाव में स्थित होते हैं, तब गुरु चांडाल योग का निर्माण होता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यदि यह योग लग्न, पंचम या नवम भाव में बने तो इसका असर अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। हालांकि इसका प्रभाव हर व्यक्ति पर समान नहीं होता, क्योंकि यह पूरी कुंडली और अन्य ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करता है।
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प्रमुख दुष्प्रभाव - फोटो : Adobe Stock
प्रमुख दुष्प्रभाव
1. निर्णय लेने की क्षमता पर असर:

इस योग के कारण व्यक्ति कभी-कभी सही और गलत में फर्क करने में उलझ सकता है। गलत संगति में पड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिससे सामाजिक छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

2. स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं:
ज्योतिष में इसे पाचन तंत्र, पेट और लिवर से संबंधित परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि स्वास्थ्य पर असर कई अन्य कारणों से भी तय होता है, इसलिए यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को ये समस्याएं हों।

3. पारिवारिक जीवन में उतार-चढ़ाव:
माना जाता है कि इस योग के कारण रिश्तों में तनाव, मतभेद या वैवाहिक जीवन में असंतुलन देखने को मिल सकता है। खासकर महिलाओं की कुंडली में इसे विवाह से जुड़े मामलों के संदर्भ में भी देखा जाता है।
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कब कम होता है इसका प्रभाव? - फोटो : Adobe Stock
कब कम होता है इसका प्रभाव?
अगर बृहस्पति मजबूत स्थिति में हो, जैसे उच्च राशि में स्थित हो या शुभ ग्रहों का साथ मिल रहा हो, तो इस योग का नकारात्मक असर कम हो सकता है। इसके अलावा, यदि गुरु केंद्र का स्वामी होकर त्रिकोण में राहु के साथ हो, तो भी इसके प्रभाव में कमी आने की संभावना मानी जाती है।

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गुरु चांडाल योग के पारंपरिक उपाय - फोटो : Adobe Stock
गुरु चांडाल योग के पारंपरिक उपाय
  • बड़ों का आदर करें और उनका आशीर्वाद लें।
  • नियमित रूप से मंदिर जाकर पूजा-पाठ करें।
  • भगवान शिव की आराधना करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करना भी लाभकारी माना जाता है।
  • मां दुर्गा की उपासना करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
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गुरु चांडाल योग के पारंपरिक उपाय - फोटो : adobe stock
  • पीपल का पौधा लगाकर उसकी देखभाल करें।
  • पीले वस्त्र, फल या अन्य पीली चीजों का दान करें।
  • जरूरतमंद विद्यार्थियों को किताबें या पढ़ाई से जुड़ी सामग्री दान दें।
  • मांसाहार और नशीले पदार्थों से दूरी बनाए रखें।

इन उपायों को श्रद्धा और नियमितता के साथ करने से मानसिक शांति और सकारात्मकता में वृद्धि हो सकती है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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