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Astrology: कुंडली में इस ग्रह की बुरी स्थिति बनती है बढ़ते कर्ज का कारण, जानें क्यों बनती है ऐसी स्थिति

Tue, 09 Dec 2025 05:15 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Loans in Astrology::ज्योतिष के अनुसार कुछ ग्रहों की स्थितियां भी निरंतर ऋण बढ़ने का कारण बन सकती हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति अनचाहे खर्चों में उलझ जाता है और बिना किसी ठोस कारण के आर्थिक बोझ बढ़ता चला जाता है। आइए जानते हैं कि आपकी कुंडली में कौन से ग्रग कर्ज का कारण बनते हैं।
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कुंडली में इस ग्रह की बुरी स्थिति बनती है बढ़ते कर्ज का कारण - फोटो : Amar Ujala
Karz Badhne Ke Karan: किसी भी व्यक्ति के जीवन में कर्ज एक बड़ा आर्थिक दबाव होता है। जब कोई इंसान ऋण के जाल में उलझ जाता है, तो उसके लिए भविष्य की योजनाएं बनाना और पूरी करना मुश्किल हो जाता है। इसका साथ ही वह वर्तमान जीवन की खुशियों भी खोने लगता है। आमतौर पर कर्ज की समस्या का संबंध व्यक्ति की आर्थिक परिस्थितियों से माना जाता है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो कुछ ग्रहों की स्थितियां भी निरंतर ऋण बढ़ने का कारण बन सकती हैं।
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ज्योतिष के अनुसार कई बार व्यक्ति की कुंडली में बने विशेष योग उसकी आर्थिक स्थिति पर शुभ प्रभाव डालते हैं। लेकिन जब वह ग्रह कमजोर हों, पाप ग्रहों के प्रभाव में हों या नीच राशि में स्थित हों, तब कर्ज संबंधी समस्याएं बार-बार आने लगती हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति अनचाहे खर्चों में उलझ जाता है और बिना किसी ठोस कारण के आर्थिक बोझ बढ़ता चला जाता है।
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तीन भाव बनते हैं कर्ड का कारण - फोटो : adobe stock
तीन भाव बनते हैं कर्ड का कारण 
कुंडली के षष्ठ, अष्टम और द्वादश, तीन भाव विशेष रूप से ऋण और आर्थिक उलझनों से जुड़े माने गए हैं। इन भावों की नकारात्मक स्थिति से संकेत मिलता है कि व्यक्ति के जीवन में कर्ज बढ़ने की संभावनाएं मौजूद हैं। इन ग्रह स्थितियों के कारण व्यक्ति को बार-बार पैसों की तंगी का सामना करना पड़ सकता है और मानसिक दबाव भी बढ़ सकता है।
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कुंडली में धन योग के लक्षण - फोटो : adobe stock
ऋण कारक है अशुभ मंगल
मंगल ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में ऋण कारक माना गया है। यदि कुंडली में मंगल अशुभ प्रभाव में हो या षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो, तो कर्ज का बोझ बढ़ने लगता है। अशुभ मंगल व्यक्ति को जल्दबाजी में निर्णय लेने, अनावश्यक खर्च करने या आर्थिक गलतियों की ओर धकेल सकता है, जिससे ऋण की स्थिति गंभीर रूप ले लेती है।

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बृहस्पति डालता है ऐसे प्रभाव - फोटो : अमर उजाला
बृहस्पति डालता है ऐसे प्रभाव
इसी प्रकार बृहस्पति या गुरु ग्रह को धन, समृद्धि और सौभाग्य का कारक माना गया है। जब गुरु ग्रह अशुभ स्थिति में होता है, तब आर्थिक स्थिरता प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति की आय सीमित हो सकती है, आय के नए साधन बनने में बाधाएं आती हैं और खर्चों का प्रबंधन कठिन हो जाता है। नतीजतन, व्यक्ति को जीवनयापन चलाने के लिए उधार या लोन का सहारा लेना पड़ सकता है।
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बृहस्पति डालता है ऐसे प्रभाव - फोटो : adobe stock
ज्योतिषीय परामर्श से व्यक्ति कर्ज के कारणों को समझ सकता है और आवश्यक उपाय अपनाकर आर्थिक स्थिरता की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
 
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