ग्रहों में युवराज कहे जाने वाले बुध 30 जनवरी को रात्रि 9 बजकर 16 मिनट पर कुंभ राशि में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। इसी अवस्था में ये 4 फरवरी को रात्रि 10 बजकर 38 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर राशि में ही गोचर करते हुए ये 21 फरवरी की सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर मार्गी होंगे और 11 मार्च को दोपहर 12 बजकर 28 पर पुनः कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। किसी भी ग्रह के वक्री होने का तात्पर्य है जातक से मुंह फेर लेना, उल्टा चलना, स्वभाव के विपरीत काम करना और जिस कार्य को सुचारू रूप से चला रहे थे उसमें बाधाएं डालना या उसग्रह से संबंधित कार्य व्यापार का शिथिल पड़ जाना आदि आदि। इनके वक्री होने के परिणामस्वरूप नेताओं में आपसी आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो जाएगा और एक दूसरे के प्रति उनकी भाषा अभद्रता की सभी सीमाएं लांघ जाएगी। मिथुन एवं कन्या राशि के स्वामी बुध, कन्या राशि में ही उच्चराशिगत तथा मीन राशि में नीच राशिगत संज्ञक माने गए हैं। इनके वक्री होने का सभी बारह राशियों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।