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Bhaum Pradosh Vrat 2026: 27 या 28 अप्रैल कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत? जानें तिथि शुभ योग और मुहूर्त

Sun, 26 Apr 2026 11:09 AM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Bhaum Pradosh Vrat 2026:प्रदोष व्रत रखने से कष्ट, रोग, दुख और पापों से मुक्ति मिलती है तथा महादेव की कृपा से इच्छाएं पूरी होती हैं। आइए जानते है अप्रैल में अखिरी प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा का समय और महत्व।
 
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भौम प्रदोष व्रत अप्रैल 2026 की तिथि - फोटो : अमर उजाला
Bhaum Pradosh Vrat April 2026 Date: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भौम प्रदोष व्रत रखा जाता है। हर महीने प्रदोष व्रत दो बार आता है, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से कष्ट, रोग, दुख और पापों से मुक्ति मिलती है तथा महादेव की कृपा से इच्छाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं इस व्रत की तिथि, पूजा का समय और महत्व।

भौम प्रदोष व्रत अप्रैल 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल को शाम 6:51 बजे शुरू होकर 29 अप्रैल को शाम 7:51 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार यह 29 अप्रैल को पड़ती है, लेकिन भौम प्रदोष व्रत 28 अप्रैल, मंगलवार को ही रखा जाएगा।

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पूजा का सही समय - फोटो : adobe stock
पूजा का सही समय
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में यानी सूर्यास्त के बाद करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव प्रसन्न होकर नृत्य करते हैं, इसलिए इस अवधि में पूजा करने से विशेष फल मिलता है।

भौम प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
28 अप्रैल को पूजा के लिए शाम 6:54 बजे से रात 9:04 बजे तक का समय उत्तम रहेगा।

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:17 से 5:00 बजे तक (स्नान के लिए श्रेष्ठ)
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 से दोपहर 12:45 बजे तक
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त्रिपुष्कर योग का विशेष संयोग - फोटो : adobe stock
त्रिपुष्कर योग का विशेष संयोग
इस बार भौम प्रदोष व्रत त्रिपुष्कर योग में पड़ रहा है, जो बेहद शुभ माना जाता है। इस योग में किए गए कार्यों का तीन गुना फल मिलता है। यह योग सुबह 5:43 बजे से शाम 6:51 बजे तक रहेगा।

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अन्य शुभ योग और नक्षत्र - फोटो : adobe stock
अन्य शुभ योग और नक्षत्र
इस दिन प्रातःकाल में व्याघात योग रहेगा, जो रात 9:04 बजे तक रहेगा। इसके बाद हर्षण योग शुरू होगा। वहीं, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सुबह से रात 10:36 बजे तक रहेगा, इसके बाद हस्त नक्षत्र प्रारंभ होगा।
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भौम प्रदोष व्रत पर शिववास - फोटो : adobe stock
भौम प्रदोष व्रत पर शिववास
इस दिन सुबह से शाम 6:51 बजे तक शिववास कैलाश पर रहेगा, इसके बाद नंदी पर माना जाएगा। इस दिन रुद्राभिषेक कराना विशेष फलदायी माना जाता है, जिससे मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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