वैदिक ज्योतिष में मेष लग्न से लेकर के मीन लग्न तक कुल मिलाकर 12 प्रकार की कुंडलियां बनती है लेकिन क्या आपको पता है कि इन 12 प्रकार की कुंडलियों में शुभ और अशुभ ग्रह अलग-अलग होते हैं तो आइए आज इस लेख में हम आपको बताते हैं कि मेष लग्न से लेकर मीन लग्न तक की कुंडली में शुभ ग्रह और अशुभ कौन-कौन से होते हैं।
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मेष लग्न
मेष लग्न की कुंडली के लिए लग्नेश और अष्टमेश मंगल शुभ होता है। पंचम भाव के स्वामी सूर्य भी शुभ होते हैं और देव गुरु बृहस्पति नवें और द्वादश भाव के स्वामी होकर भी योगकारक कहे जाते हैं।
वृष लग्न
वृष लग्न की कुंडली में लग्नेश और छठे भाव के स्वामी शुक्र शुभ ग्रह होते हैं। पंचम और दूसरे भाव के स्वामी बुध भी शुभ ग्रह कहे जाते हैं और वृषभ लग्न की कुंडली में शनि देव नौवें और दसवें भाव के स्वामी होकर के परम राजयोग कारक कहे जाते हैं।
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मिथुन लग्न
मिथुन लग्न की कुंडली में लग्नेश और चौथे भाव के स्वामी बुध शुभ ग्रह होते हैं। पंचम और द्वादश भाव के स्वामी शुक्र भी शुभ ग्रह माने जाते हैं।
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कर्क लग्न
कर्क लग्न की कुंडली में लग्नेश चंद्रमा शुभ कारक होता है। पंचम और दशम भाव के स्वामी मंगल परम राजयोग कारक होते हैं और नवे भाव के स्वामी बृहस्पति भी कर्क लग्न के जातकों के लिए शुभ रहते हैं।
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सिंह लग्न
सिंह लग्न की बात करें तो इस लग्न के जातकों के लिए सूर्य लग्नेश होकर शुभ होते हैं। मंगल नवमेश और चतुर्थेश होकर के भी कुंडली में राजयोग कारक हो जाते हैं।
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कन्या लग्न
कन्या लग्न की कुंडली में लग्नेश और दशमेश बुध शुभ होते हैं। पंचमेश और और छठे भाव के स्वामी शनि भी योगकारक ग्रह कहीं जाते हैं।
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तुला लग्न
तुला लग्न के जातकों के लिए बुध नवे भाव के स्वामी होकर के शुभ फल प्रदान करते हैं। वही शुक्र लग्न का स्वामी होकर शुभ फल देता है। इसके अलावा शनि केंद्र और त्रिकोण के स्वामी होने के कारण राजयोग कारक हो जाते है।
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वृश्चिक लग्न
वृश्चिक लग्न की कुंडली के लिए लग्नेश मंगल छठे भाव के स्वामी भी होते हैं लेकिन लग्नेश होने के कारण वह शुभ फल देने वाले कहें जाते हैं। वृश्चिक लग्न के जातकों के लिए पांचवें भाव और दूसरे भाव के स्वामी बृहस्पति भी शुभ ग्रह होते हैं। इसके अलावा नवम भाव के स्वामी चंद्रमा परम राजयोग कारक ग्रह होते हैं।
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धनु लग्न
धनु लग्न की कुंडली के लिए लग्नेश और चौथे भाव के स्वामी बृहस्पति शुभ होते हैं। पांचवें और बारहवें भाव का स्वामी मंगल राजयोग कारक होता है और नवम भाव का स्वामी सूर्य बेहद शुभ परिणाम देने वाला होता है।
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मकर लग्न
मकर लग्न की कुंडली में लग्न का स्वामी शनि राजयोग कारक होता है। पंचमेश और दशमेश शुक्र भी बेहद शुभ परिणाम देने वाला होता है क्योंकि एक त्रिकोण और केंद्र का स्वामी होने पर ग्रह बेहद बलवान हो जाता है। मकर लग्न के जातकों के लिए नवे भाव के स्वामी बुध भी अच्छे फल देने वाले कहे गए हैं।
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कुंभ लग्न
कुंभ लग्न के जातकों के लिए लग्नेश शनि बारहवें भाव के भी स्वामी होते हैं लेकिन लग्नेश होने के कारण शुभ ग्रह है। इसके अलावा चौथे और नवे भाव के स्वामी शुक्र को भी अच्छा ग्रह माना जाता है। शुक्र कुंभ लग्न के जातकों को सभी भौतिक सुख सुविधाएं प्रदान करता है।
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मीन लग्न
मीन लग्न के जातकों के लिए लग्नेश और दशमेश बृहस्पति शुभ होते हैं। पांचवें भाव के स्वामी चंद्रमा त्रिकोण के स्वामी होकर के राजयोग कारक होते हैं। इसके अलावा मंगल भाग्य स्थान का स्वामी होता है इसीलिए मीन लग्न के जातकों को मंगल भी शुभ फल प्रदान करता है।
आइए अब समझते है कि मेष से लेकर मीन लग्न तक की कुंडली में अशुभ ग्रह कौन कौन होते हैं।
मेष लग्न के लिए बुध शुक्र शनि पाप ग्रह होते हैं। वृष लग्न के जातकों के लिए चंद्र मंगल बृहस्पति पाप ग्रह होते हैं। मिथुन लग्न के जातकों के लिए सूर्य मंगल शनि पाप ग्रह होते हैं। कर्क लग्न के जातकों के लिए बुध शुक्र शनि पाप ग्रह होते हैं।
सिंह लग्न के जातकों के लिए बुध शुक्र शनि पाप ग्रह होते हैं। कन्या लग्न के जातकों के लिए मंगल और चंद्र पाप ग्रह होते हैं। तुला लग्न के जातकों के लिए मंगल बृहस्पति और सूर्य पाप ग्रह होते हैं। वृश्चिक लग्न के जातकों के लिए बुध शनि शुक्र का उपग्रह होते हैं।
धनु लग्न के जातकों के लिए शुक्र शनि पाप ग्रह हो जाते हैं। मकर लग्न के जातकों के लिए मंगल और बृहस्पति पाप ग्रह होते हैं। कुंभ लग्न के जातकों के लिए चंद्र मंगल गुरु पाप ग्रह हो जाते हैं। मीन लग्न के जातकों के लिए सूर्य शुक्र शनि पाप ग्रह हो जाते हैं।