Astrology Rules For Marriage: वर्ष 2026 में विवाह की योजना बना रहे लोगों के लिए ज्योतिष शास्त्र से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नए कैलेंडर में 5 फरवरी 2026 से 12 दिसंबर 2026 के बीच विवाह के लिए कुल 59 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। इस अवधि में कई ऐसे महीने होंगे जिनमें एक से अधिक शुभ तिथियां उपलब्ध रहेंगी, जिससे शादी-विवाह के लिए यह समय बेहद अनुकूल माना जा रहा है। हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास और अधिक मास के कारण अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में विवाह मुहूर्त नहीं होंगे, इसलिए इन महीनों में शादी करने की परंपरा नहीं है।
शास्त्रों के अनुसार विवाह केवल एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है, जिससे परिवार, समाज और वंश परंपरा का संचालन होता है। विवाह व्यक्ति के जीवन में सुख, स्थिरता और समृद्धि ला सकता है, लेकिन यदि विवाह तय करते समय आवश्यक सावधानियों को नजरअंदाज किया जाए तो यही संबंध भविष्य में दुख का कारण भी बन सकता है। इसी कारण शास्त्रों में कुंडली मिलान के साथ-साथ विवाह से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम और जानकारियां बताई गई हैं, जिनका पालन करने से वैवाहिक जीवन सफल और सुखमय बनता है।
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विवाह से जुड़े ऐसे नियम मुख्य रूप से धर्मशास्त्र, गृह्यसूत्र, और मूहूर्त शास्त्र में उल्लेखित हैं। विशेष रूप से मनुस्मृति, पराशर स्मृति, विष्णु धर्मसूत्र, तथा आश्वलायन और आपस्तंब गृह्यसूत्र में विवाह संस्कार से संबंधित मर्यादाओं और निषेधों का वर्णन मिलता है। इसके अलावा ज्योतिष पर आधारित ग्रंथ जैसे मूहूर्त चिंतामणि, धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु, मुहूर्त मार्तंड और जातक पारिजात में विवाह लग्न की शुद्धता, ग्रह दशा, वर्ष-गणना, ज्येष्ठ संतान, सहोदर विवाह और मंगल कार्यों के अंतर जैसे नियम बताए गए हैं। वर्तमान समय में ज्योतिषाचार्य इन्हीं शास्त्रीय ग्रंथों और परंपरागत आचारों के आधार पर विवाह से जुड़े नियमों का उल्लेख और मार्गदर्शन करते हैं। आइये जानते हैं नियमों के बारे में।
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