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Marriage Yoga in Kundli: कब और कैसे बनते हैं शादी के योग, जानें प्रेम विवाह और ग्रहों का पूरा खेल

Thu, 02 Apr 2026 06:16 PM IST
Jyoti Mehra ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Vivah Yog In Kundali: किसी व्यक्ति का विवाह कब होगा, किस प्रकार होगा या उसमें विलंब होगा या नहीं, इन सभी प्रश्नों के उत्तर व्यक्ति की जन्म कुंडली में छिपे होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि कुंडली में विवाह के योग कब बनते हैं और शादी का समय कैसे पता लगा सकते हैं।
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कुंडली के इन संकेतों से जानें आपकी शादी का समय - फोटो : Amar Ujala
Marriage Predictions Based On Horoscope: जन्म कुंडली में विवाह योग का आकलन मुख्य रूप से सातवें भाव, उसके स्वामी और संबंधित ग्रहों की स्थिति के आधार पर किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी व्यक्ति का विवाह कब होगा, किस प्रकार होगा या उसमें विलंब होगा या नहीं, इन सभी प्रश्नों के उत्तर कुंडली में छिपे होते हैं।

विवाह के योग कब बनते हैं?
कुंडली का सातवां भाव (7th House) वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी और साझेदारी का प्रतिनिधित्व करता है। यदि इस भाव में शुक्र, बुध या बृहस्पति जैसे शुभ ग्रह स्थित हों, तो विवाह के अनुकूल योग बनते हैं। इसके साथ ही यदि सातवें भाव का स्वामी (सप्तमेश) मजबूत स्थिति में हो और केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) भावों में स्थित हो, तो यह विवाह के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।

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शुक्र और बृहस्पति विवाह के कारक - फोटो : अमर उजाला
शुक्र और बृहस्पति विवाह के कारक
ज्योतिष में पुरुषों की कुंडली में शुक्र ग्रह को पत्नी का कारक माना जाता है। यदि शुक्र मजबूत, उच्च या शुभ दृष्टि में हो, तो विवाह जल्दी और सुखद होने की संभावना बढ़ जाती है। 

वहीं, महिलाओं की कुंडली में बृहस्पति (गुरु) को पति का कारक ग्रह माना गया है। गुरु की अच्छी स्थिति जीवन में योग्य जीवनसाथी और समय पर विवाह के योग बनाती है।
 
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महादशा या अंतर्दशा में होता है विवाह - फोटो : Adobe Stock
महादशा या अंतर्दशा में होता है विवाह
गोचर का भी विवाह में महत्वपूर्ण योगदान होता है। जब गोचर में बृहस्पति सातवें भाव, लग्न या सप्तमेश पर दृष्टि डालता है, तब विवाह तय होने या संबंध पक्का होने के योग प्रबल हो जाते हैं। इसके अलावा, विवाह अक्सर शुक्र या बृहस्पति की महादशा या अंतर्दशा में होता है। यदि उस समय सप्तमेश की दशा भी सक्रिय हो, तो विवाह की संभावनाएं और बढ़ जाती हैं।

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विवाह में देरी या बाधा के संकेत - फोटो : adobe stock
विवाह में देरी या बाधा के संकेत
यदि सातवें भाव पर शनि की दृष्टि हो या शनि वहां स्थित हो, तो विवाह में विलंब हो सकता है, लेकिन विवाह से इंकार नहीं होता। इसी तरह कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में मंगल की उपस्थिति को मांगलिक दोष से जोड़ा जाता है, जिससे विवाह में रुकावटें आ सकती हैं। लेकिन सही गुण मिलान और उपायों के बाद विवाह संभव हो जाता है।

राहु और केतु का प्रभाव भी विवाह को प्रभावित करता है। यदि ये ग्रह सातवें भाव में हों, तो रिश्तों में उतार-चढ़ाव या बाधाएं आ सकती हैं। साथ ही, ऐसे योग अंतर्जातीय या पारंपरिक से हटकर विवाह के संकेत भी देते हैं।
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प्रेम विवाह का योग - फोटो : Adobe Stock
प्रेम विवाह का योग
कुंडली में लग्नेश और सप्तमेश का आपसी संबंध भी विवाह के प्रकार को दर्शाता है। यदि ये दोनों ग्रह एक-दूसरे के साथ हों या एक-दूसरे को दृष्टि दे रहे हों, तो यह प्रेम विवाह या शीघ्र विवाह का संकेत देता है। इसके अलावा नवांश कुंडली (D9 chart) का विश्लेषण भी वैवाहिक जीवन की गहराई से जानकारी देता है, जिसे ज्योतिष में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता और संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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