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Transgender Facts: क्यों नहीं करना चाहिए किन्नरों को नाराज? जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

Fri, 05 Aug 2022 11:40 AM IST
आशिकी पटेल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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किन्नरों का आशीर्वाद और बद्दुआ दोनों क्यों होते हैं फलित? - फोटो : iStock
Transgender Facts in Hindi: किन्नर हमारे समाज का एक अहम हिस्सा हैं। अक्सर शुभ अवसरों शादी-ब्याह, बच्चों के जन्म जैसे खास मौकों पर किन्नरों द्वारा घर में आकर नाच-गाना करने और दक्षिणा लेने की परंपरा है। सिर्फ मांगलिक कार्य ही नहीं बल्कि त्योहारों पर भी किन्नरों को दान-दक्षिणा दी जाती है। कहा जाता है कि किन्नरों पर ईश्वर की विशेष कृपा होती है। इनकी दुआएं बहुत शुभ होती हैं। किन्नरों का आशीर्वाद पाने से जीवन सुखी होता है। यही वजह है कि लोग किन्नरों को दिल खोलकर दान करते हैं। लेकिन यदि किन्नर नाराज हो जाएं और किसी को गुस्से में बद्दुआ दे दें, तो ये बहुत ही अशुभ होता है। मान्यता है किन्नर की बद्दुआ यदि किसी को लगती है तो उसके घर-परिवार पर संकट आने लगता है। किन्नरों के आशीर्वाद और बद्दुआ दोनों ही आखिर क्यों प्रभावशाली माने गए हैं? आइए जानते हैं...  
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किन्नरों का आशीर्वाद और बद्दुआ दोनों क्यों होते हैं फलित? - फोटो : iStock
किन्नरों के आशीर्वाद से आती है बरकत
किन्नरों के आशीर्वाद से जीवन में खुशियां आती है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें प्रभु श्री राम से आशीर्वाद प्राप्त है। मान्यताओं के अनुसार, प्रभु श्री राम जब 14 वर्ष का वनवास काटने के लिए अयोध्या छोड़ने लगे, तब उनकी प्रजा और किन्नर समुदाय भी उनके पीछे-पीछे चलने लगे थे। तब श्री प्रभु राम ने कहा कि सभी स्त्री और पुरुष वापस लौट जाएं। 
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किन्नरों का आशीर्वाद और बद्दुआ दोनों क्यों होते हैं फलित? - फोटो : अमर उजाला
वहीं 14 साल बाद जब श्री राम वापस अयोध्या लौटे तो उन्होंने देखा बाकी लोग तो चले गए थे, लेकिन किन्नर वहीं पर उनका इंतजार कर रहे थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रभु श्रीराम ने किन्नरों को वरदान दिया कि उनका आशीर्वाद हमेशा फलित होगा। 

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किन्नरों का आशीर्वाद और बद्दुआ दोनों क्यों होते हैं फलित? - फोटो : Fariha Zahin Faaris (Twitter)
मान्यता है कि आज भी जिसे किन्नर का आशीर्वाद मिल जाए उसकी किस्मत रातोंरात चमक जाती है। यही वजह है कि बच्चे के जन्म और विवाह आदि मांगलिक कार्यों में वे लोगों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
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किन्नरों का आशीर्वाद और बद्दुआ दोनों क्यों होते हैं फलित? - फोटो : अमर उजाला
न लें कभी किन्नरों की बद्दुआ
कहा जाता है कि यदि आप किन्नर को खुश नहीं कर सकते तो उन्हें नाराज भी न करें। वहीं शास्त्रों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किन्नरों का अपमान करता है या उनका मजाक उड़ाता है तो उसे अगले जन्म में किन्नर बनना पड़ता है और ऐसा ही अपमान सहना पड़ता है। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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