धरती पुत्र मंगल ग्रह की तो ज्योतिष शास्त्र में उसे ग्रहों का सेनापति कहा जाता है। मंगल साहस, अग्नि, शक्ति और ऊर्जा के सूचक हैं। इनके प्रभाव से जातक परिश्रमी, महत्वाकाक्षी, स्वंतत्र विचारों वाला और नेतृत्व करने वाला होता है। वहीं मंगल के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति में असहनशीलता आती है और उसके जीवन में कलह, विवाद आदि प्रवेश कर जाते हैं।
वैदिक ज्योतिष में जिन तमाम दोषों को खतरनाक बताया गया है, उसमें मंगल दोष भी शामिल है। यही कारण है कि विवाह आदि से पहले किसी भी कुंडली को मिलाते समय इस दोष को विशेष रूप से देखा जाता है। वैदिक ज्योतिष के मुताबिक किसी भी व्यक्ति में ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखने के लिए इस दोष के प्रभाव को दूर करना अत्यंत आवश्यक होता है। तो आइए जानते हैं मंगल का दोष दूर कर उनकी कृपा दिलाने वाले महाउपाय के बारे में —