Kaalsarp Yog in Kundali: वैदिक ज्योतिष के अनुसार छाया ग्रह राहु और केतु के मध्य जब बाकी के ग्रह आ जाते हैं यानी कि सूर्य चंद्रमा मंगल बुध गुरु शुक्र और शनि ये सातों ग्रह जब राहु और केतु के मध्य स्थित होते हैं तो कुंडली में कालसर्प योग का प्रादुर्भाव माना जाता है। कालसर्प योग के बारे में कहा जाता है कि जातक को इसके कई दुष्परिणाम झेलने पड़ते हैं। उदाहरण स्वरूप उसे मानसिक कष्ट होता है. उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। उसे पैतृक संपत्ति प्राप्त नहीं होती उसे धोखा प्राप्त होता है। वह जन्म स्थान में प्रसिद्ध नहीं होता। शिक्षा प्राप्त होने के बाद भी उसका उपयोग नहीं कर पाता। उसका गृहस्थ जीवन सुखी नहीं रहता यानी कुल प्रकार से कालसर्प योग के जो परिणाम है वह अशुभ ही माने गए हैं।