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इन पांच वजह से है शरद पूर्णिमा का इतना महत्व

Sat, 05 Oct 2019 08:02 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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sharad purnima
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष स्थान होता है। हर महीने होने वाली पूर्णिमा खास होती है। आश्विन मास की पूर्णिमा इसी में से एक होती है। आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। आइए जानते हैं क्यों शरद पूर्णिमा का सभी पूर्णिमा में खास स्थान है।
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पूर्णिमा 2019
वैसे तो सभी पूर्णिमा वाली तिथि पर चांद देखने लायक होता है लेकिन अश्विन मास की पूर्णिमा पर रात चांद की रोशनी में पूरी तरह से नहाया हुआ होता है। शरद पूर्णिमा पर रात में जागरण, भजन करने और रात भर चांदनी रात में रखी खीर को सुबह भोग लगाने का विशेष रूप से महत्व है। 
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भगवान विष्णु
शरद पूर्णिमा के दौरान चातुर्मास लगा होता है जिसमें भगवान विष्णु सो रहे होते हैं। चातुर्मास का यह अंतिम चरण होता है। शरद पूर्णिमा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन दिनों से सुबह और शाम को सर्दी का अहसास होने लगता है।

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चंद्रमा - फोटो : Pixabay
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चांद अपनी सभी 16 कलाओं से संपूर्ण होकर अपनी किरणों से रात भर अमृत की वर्षा करता है। इस दिन चांदनी की रात में रखी खीर अमृत के समान होती है।
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शरद पूर्णिमा
इसके अलावा यह भी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन  भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था। इस कारण से इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
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लक्ष्मी पूजा - फोटो : SOCIAL MEDIA
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी रात्रि भ्रमण पर होती हैं और जो उन्हें जागरण करते हुए मिलता है उस पर अपनी कृपा बरसाती हैं।
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