मकर संक्रांति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। इस दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति आरम्भ होती है जिसका धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों दृष्टि से काफी महत्व है। इस वर्ष सूर्य14 जनवरी की रात को यानी 15 जनवरी को भारतीय समयानुसार 1 बजकर 34 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। हिन्दू रीति से सूर्य उदय के बाद से नए दिन का आरम्भ माना जाता है अतः मकर संक्रांति का पर्व इस बार 15 जनवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिषशास्त्री सचिन मल्होत्रा बता रहे हैं इस बार मकर संक्रांति के दिन बनने वाला ग्रह योग कुछ अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं। ऐसे में इन बातों की आशंका है।
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मकर संक्रांति की कुंडली पर है शनि मंगल की अशुभ दृष्टि, हो सकती हैं यह बड़ी घटनाएं
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सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के समय की कुंडली का मेदिनी ज्योतिष में राष्ट्र की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक सिथति के सम्बन्ध में आने वाले तीन महीनों की भविष्यवाणी करने के लिए उपयोग किया जाता है। इस वर्ष सूर्य के मकर राशि में प्रवेश की कुंडली बड़ी अशुभ बन रही है। तुला लग्न की इस कुंडली में लग्न में पाप ग्रह मंगल विराजमान हैं। मंगल की सप्तम और अष्टम भाव पर पड़ रही दृष्टि आतंकवाद, सीमा विवाद, युद्ध, और बड़े नेताओं की सुरक्षा में सेंध के खतरे का संकेत दे रही है।
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मकर संक्रांति की कुंडली में दशमेश चन्द्रमा की छठे भाव में अशुभ स्थिति केंद्र की मोदी सरकार के लिए मुश्किल सिथति पैदा कर सकती है। वैश्विक महामंदी सरकार की आर्थिक नीतियों को आने वाले कुछ महीनों में धक्का पंहुचा सकती है। शेयर बाजार में तेजी से गिरावट सरकार की आर्थिक नीतियों पर कई सवाल खड़े कर देगी। नवमांश कुंडली में बारहवें भाव में ग्रहों का जमावड़ा अर्थव्यवस्था में गिरावट का संकेत है।
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संक्रांति कुंडली में सूर्य पर पड़ रही शनि और मंगल दो पाप ग्रहों की दृष्टि अगले 30 दिनों में उत्तर भारत में आतंकी वारदातों का ख़तरा दर्शा रही है। वृश्चिक राशि से प्रभावित दिल्ली-एनसीआर विशेष रूप से इस विषय में काफी संवेदनशील रहेंगे। जनवरी के पहले सप्ताह में पठानकोट आतंकी हमले के बाद से भारत में आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से काफी सतर्कता बरती जा रही है। परन्तु ज्योतिषीय संकेत यह हैं की अगले एक माह में आतंकी फिर किसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं जिससे भारत-पाक शांति वार्ता रद्द हो जाएगी और दोनों देशों की सीमाओं पर तनाव काफी बढ़ जाएगा।