मनुष्य के शरीर का हर अंग किसी न किसी ग्रह के प्रभाव में होता है। इससे हमारा हृदय भी अछूता नहीं है। जानिए ग्रह किस प्रकार से हमारे हृदय को प्रभावित करते हैं।
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नहीं जानते होंगे, इस तरह ग्रहों से प्रभावित होता है आपका दिल
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सूर्य को ज्योतिषशास्त्र में हृदय का कारक और हृदय की आत्मा कहा गया है। सूर्य अनुकूल होने पर हृदय सामान्य रुप से धड़कता रहता है। सूर्य के प्रतिकूल होने पर धड़कन की रफ्तार कम होने लगती है।
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ज्योतिषशास्त्र में चन्द्रमा को जल तत्व का कारक माना गया है। यह भी आपके हृदय को प्रभावित करता है। इसका काम शुद्घ रक्त को गाढ़ा बनाकर पूरे शरीर में संचार करना है।
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मंगल ग्रह को ज्योतिषशास्त्र में रक्त का कारक कहा गया है। इसका काम रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा को सामान्य बनाए रखना होता है।
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बुध का प्रभाव शरीर में नाड़ियों पर होता है। इसका काम हृदय की स्नायविक नाड़ियों का नियंत्रण करना है।
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गुरु ग्रह का काम शुद्घ रक्त को विकारों से बचाना होता है। इसके अलावा कोलेस्ट्रोल की मात्र को भी नियंत्रित करता है। गुरू के प्रतिकूल होने पर कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ने से हृदय रोग की संभावना बनने लगती है।
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जब सारे ग्रह कुछ न कुछ काम कर रहे हैं तो भला शनि पीछे क्यों रहें। इनका काम अशुद्घ रक्त को हृदय से फेफड़ों तक पहुंचाना। शनि के प्रतिकूल होने पर धमनी के छिद्र संकीर्ण होने लगते हैं और हृदय में रक्त का प्रवाह समुचित नहीं होने पर हृदय रोग उत्पन्न होने की संभावना बनती है।