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Holi 2021: होली आज, ग्रहों का दुर्लभ संयोग एक राशि में शनि-गुरु

Mon, 29 Mar 2021 12:02 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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होली 2021 - फोटो : अमर उजाला
आज देश में रंगों का त्योहार होली खेली जा रही है। रंगों का यह त्योहार हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होलिका जलाने के बाद अगले दिन मनाया जाता है। होली भारत के मुख्य पर्वों में से एक है जिसे बेहद धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। रंगों के साथ होली में गुजियों की मिठास, प्रेम, बंधुत्व, लोक कला, फागुन के गीत आदि की छटा भी देखने को मिलती है। इस साल होली पर कई संयोग बन रहे हैं जिससे होली के त्योहार का महत्व और बढ़ जाएगा। 
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होली में सबसे बड़े और अहम ग्रह शनि और गुरु, होली के दिन मकर राशि में विराजमान होंगे। - फोटो : Pixabay
मकर राशि में शनि और देवगुरु बृहस्पति
होली में इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग, ध्रुव योग, अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जिन्हें मुहूर्त शास्त्र में बहुत ही शुभ माना जाता है। वहीं ग्रह नक्षत्र की बात करें तो, होली के दिन चंद्रमा कन्या राशि में स्थित होगा। इसके अलावा दो सबसे बड़े और अहम ग्रह शनि और गुरु, होली के दिन मकर राशि में विराजमान होंगे। वहीं शुक्र और सूर्य ये दोनों ही मीन राशि में रहेंगे। मंगल और राहु वृषभ राशि में, बुध कुंभ राशि और केतु वृश्चिक राशि में विराजमान होगा।
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होलिका दहन 2021: होलिका दहन का शुभ मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला
होलिका दहन मुहूर्त 2021
28 मार्च को दिन में 1 बजकर 54 मिनट पर भद्रा समाप्त हो जाएगा। ऐसे में प्रदोष काल में इस बार होलिका दहन किया जाना शुभ फलदायी रहेगा। होलिका दहन का मुहूर्त शाम 06:20 से 08:41 तक रहेगा। इस वर्ष होलिका दहन के समय वृद्धि योग उपस्थित रहेगा। अपने नाम के अनुसार यह योग सभी शुभ कर्मों में वृद्धि और उन्नति प्रदान करने वाला रहेगा। वृद्धि योग के साथ होलिका दहन के दिन कई और भी शुभ योग उपस्थित होंगे।

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फाल्गुन पूर्णिमा 2021 - फोटो : अमर उजाला
फाल्गुन पूर्णिमा 2021
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – मार्च 28, 2021 को 03:27 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – मार्च 29, 2021 को 00:17 बजे
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होलिका दहन में गाय के गोबर से बने कंडे और कुछ चुने हुए पेड़ों की लकड़ियों को ही जलाना चाहिए। - फोटो : अमर उजाला
होलिका दहन से जुड़े नियम
होलिका दहन में गाय के गोबर से बने कंडे और कुछ चुने हुए पेड़ों की लकड़ियों को ही जलाना चाहिए। क्योंकि धार्मिक दृष्टि से भी पेड़ों पर किसी न किसी देवता का आधिपत्य होता है। उनमें देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसलिए तीज-त्योहारों पर शास्त्रों में पेड़ों की पूजा करने का भी विधान है, जो हमारे लिए स्वास्थ्य वर्धक व हमारे प्राणों के रक्षक हैं। इसलिए हरे पेड़ों का होलिका दहन नहीं करना चाहिए।
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होलिका दहन से जुड़ी प्रहलाद कथा - फोटो : अमर उजाला
होलिका दहन से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्रहलाद जन्म से ही ब्रह्मज्ञानी थे और हरपल भगवत भक्ति में लीन रहते थे, उन्हें सभी नौ प्रकार की भक्ति प्राप्त थी। भक्ति मार्ग के इस चरम सोपान को प्राप्त कर लेने के बाद प्राणी परमात्मा को प्राप्त कर लेता है। प्रहलाद भी इसी चरम पर पहुंच गये थे जिसका उनके पिता हिरण्यकश्यपु अति विरोध करते थे किंतु, जब प्रहलाद को नारायण भक्ति से विमुख करने के उनके सभी उपाय निष्फल होने लगे तो, उन्होंने प्रह्लाद को फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी को बंदी बना लिया और मृत्यु हेतु तरह तरह की यातनायें देने लगे, किन्तु प्रहलाद विचलित नहीं हुए। प्रतिदिन प्रहलाद को मृत्यु देने के अनेकों उपाय किये जाने लगे किन्तु भगवत भक्ति में लीन होने के कारण प्रहलाद हमेशा जीवित बच जाते।

इसी प्रकार सात दिन बीत गये आठवें दिन अपने भाई हिरण्यकश्यपु की परेशानी देख उनकी बहन होलिका (जिसे ब्रह्मा द्वारा अग्नि से न जलने का वरदान था) ने प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में भस्म करने का प्रस्ताव रखा जिसे हिरण्यकश्यपु ने स्वीकार कर लिया। परिणाम स्वरूप होलिका जैसे ही अपने भतीजे प्रहलाद को गोद में लेकर जलती आग में बैठीं तो, वे स्वयं जलने लगीं और प्रहलाद पुनः जीवित बच गए क्योंकि उनके लिए अग्निदेव शीतल हो गए थे। 
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