ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति ग्रह को शुभ ग्रह माना जाता है। यह ज्ञान, गुरु, धर्म, विवाह, संतान, वृद्धि आदि का कारक है। ये धनु और मीन राशि के स्वामी हैं। देवगुरु जहां कर्क राशि में उच्च के होते हैं तो वहीं मकर राशि में ये नीच के माने जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत स्थिति में होता है तो वह जातक हर मुश्किल से बाहर निकल जाता है लेकिन यही जब कमजोर होता है तो जातक को अपने जीवन में कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। देवगुरु बृहस्पति वर्तमान में अपनी वक्री अवस्था में हैं और वे 14 सितंबर को मकर राशि में मार्गी होंगे। फिर इसके कुछ समय बाद 21 नवंबर को गुरु फिर से कुंभ राशि में आ जाएंगे। गुरु के वक्री चाल से 14 सितंबर तक कुछ विशेष राशियों को सावधान रहने की आवश्यकता होगी। इस दौरान इन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।